मुचलका – शिशिर मधुकर

बात तुझसे जो करी सारी दिल ये हल्का हुआ वरना कब से मेरा चेहरा था बहुत ढलका हुआ असर तू देख ज़रा इक प्रेम रस पिलाने का ख़ुशी का घट मेरा लगता है देख छलका हुआ आज तू नाम ले बस अपने पुनीत रिश्ते का हीर रांझे का भी किस्सा है अब तो कल का हुआरोशनी प्यार की इक रस्ता मुझे दिखाएगी चली आ जल्दी कि अब फिर यहाँ धुंधलका हुआमुझे ना चैन मिला देखो तो फकत आने सेसांस मधुकर ये चली जब मिलने का मुचलका हुआ शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 22/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2019
  2. डी. के. निवातिया 22/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2019

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