खोट – शिशिर मधुकर

कोई तो खोट है मेरा हमदम ना कोई पास है बेबस गुजरती जिंदगी अब ना जगाती आस है राहें तनहा सी हो गईं मौसम भी एक सा हुआबोझिल बना है ये सफर ना हास और परिहास हैहर बात जिससे कह सकें ऐसा ना कोई भी बचाहर आदमी है स्वार्थी लगता ना कोई ख़ास है राम के भी संग में लक्ष्मण और हनुमान थे पर मेरा तो एकदम तनहा सकल वनवास है अब साल जो भी जा रहा उसमे भी कुछ ऐसा हुआ सारे महीने हैं मगर ना मधुकर कोई मधुमास है शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 22/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2019
  2. डी. के. निवातिया 22/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2019

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