सपना सलोना – शिशिर मधुकर

मन की खुशी हो या कोई गम हो कह डाला तुम से ही आ के कब से अधूरा था सपना सलोना पूरा हुआ तुम को पा के सुन्दर बहुत बोल लिख डाले उसने लेकिन ना कोई भी जानाउसको अमर गीत तुमने बनाया वाणी में अपनी गा केचारों तरफ बस अगन ही अगन थी सहमा हुआ था ये आलम बरसा ना हो चाहे बादल ये काला ठंडक तो दी इसने छा के सोचा था जो भी ना मुझको मिलेगा मुमकिन बनाया था तुमने मेरा सुकूं तुमको जां से था प्यारा तुम खुश हुए उसको ला के मौसम बदलता है दुनिया बदलती है पर तुम ना बदले हो मधुकर ढूंढे कहां आज मिलता है साथी जो तोड़े ना कसमों को खा के शिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

8 Comments

  1. डी. के. निवातिया 15/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 17/05/2019
  2. Vikash Kumar 15/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 17/05/2019
  3. Bindeshwar Prasad sharma 16/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 17/05/2019
  4. amritanshuom 06/06/2019
    • Shishir "Madhukar" 06/06/2019

Leave a Reply