चेहरे के पीछे चेहरा – अनु महेश्वरी

चाहती हूँ समय को,अपनी मुट्ठी में कैद करलूँ,लोगो से बेपरवाह हो,ताजी हवा सासों में भरलूं।पर रोके किसी केसमय कब रुका है भला,यह मस्त अपने में,सबकुछ अतीत कर चला।फिक्र नहीं मुझे कल की,जीने की सीख लूँगी कला,अब जिसे देखा ही नहीं,फिक्र क्यों हो उसकी भला।लोगों को समझना,थोड़ा मुश्किल हुआ अब,चेहरे के पीछे चेहरा,जब लिए घूम रहें हो सब।भीड़ खूब आसपास यहाँबस अपनेपन की कमी है,अकेले सब चल रहे जहाँआँखों में सभी के नमी है।अनु महेश्वरी

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 13/05/2019
    • ANU MAHESHWARI 15/05/2019
  2. C.M. Sharma 14/05/2019
    • ANU MAHESHWARI 15/05/2019
  3. डी. के. निवातिया 14/05/2019
    • ANU MAHESHWARI 15/05/2019
  4. rakesh kumar 26/05/2019
    • ANU MAHESHWARI 22/06/2019
  5. Ram Gopal Sankhla 27/05/2019
    • ANU MAHESHWARI 22/06/2019

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