समंदर की तरह – डी के निवातिया

समंदर की तरह***पास होकर भी दूर कितने हम धरती अम्बर की तरहसाथ है मगर वर्ष की दुरी है जनवरी-दिसंबर की तरहन मिलते है कभी न बिछुड़ने का कोई बहाना मिलताकोई मंज़िल न किनारा बहते रहते है समंदर की तरह !!!स्वरचित : डी के निवातिया

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/05/2019
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/05/2019

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