हाथ से रेत की मानिंद फिसल जाऊँगा…ग़ज़ल…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

हाथ से रेत की मानिंद फिसल जाऊँगा….मौत का हाथ पकड़ चुपके निकल जाऊँगा….तू अगर साथ दे काँटों में भी खिल जाऊँगा…भोर के तारे सा हर राह में जल जाऊंगा…रात ज़ीने पे रुकी होगी अभी पर मैं तो….ख्वाब बन कर तेरी आँखों में फिसल जाऊँगा…ज़िन्दगी कहते रहें वो है तमाशा दो दिन…मैं मगर उम्र तमाम याद में पल जाऊँगा….कर के वादा यूं मुकरना तो न बस में ‘चन्दर’…तू अगर चाहे तो मैं राख में ढल जाऊंगा…\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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6 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 08/05/2019
    • C.M. Sharma 14/05/2019
  2. Shishir "Madhukar" 08/05/2019
    • C.M. Sharma 14/05/2019
  3. डी. के. निवातिया 09/05/2019
    • C.M. Sharma 14/05/2019

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