इरशाद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

इरशाद कहियेगा तो मैं कुछ बोल दूँचेहरे पर लगा पर्दा उसे मैं खोल दूँ।घबराने की बात अब मैं नहीं करतानाम वाले को मैं इक रत्ती से तोल दूँ।फर्जी वाड़े में नाम बहुतों का हो रहाआप ही कहो मैं उसका क्या मोल दूँ।कहने भर के समाजवादी बन गयेलकड़ी के जैसा लगता है छोल दूँ।गद्दारों को मैं नहीं छोड़ने वालालगता है पकड़ कर फांसी में झोल दूँ।इंसान को तमाशा रख दिया बनाकरउसके जीवन में लगता जहर घोल दूँ।

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 08/05/2019
  2. डी. के. निवातिया 09/05/2019

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