मैं तुम्हे फिर मिलूँगा

मैं तुम्हे फ़िर मिलूँगाकब ,कहाँ और कैसे ये तो नहीं पतापर दुनिया गोल है शायद इसलिए कभी न कभी और कहीं न कहीं मैं तुम्हे फिर मिलूँगागर लिखा होगा मिलना दुबाराकिस्मत की लकीरों में तोतुम वक़्त के किसी खास हिस्से मेंमुझसे मिल ही जाओगीमुझे देखने से भले तुम्हारी आँखे गुरेज करेंगीया हो सकता हैकी तुम मेरा पूरा अस्तित्व ही नकार जाओपर तुम्हारा दिल तुम्हारी सुनेगा नहींऔर मुझे देख कर वो जोर-जोर से धड़कने लगेगामैं तुम्हे फिर मिलूँगाइस जन्म में हीतुम्हे अपने एहसासों में फिर से शरोबार करनेतुम्हारे यादों का पूरा कारवाँ ले करतुम्हे भींगा पसंद है ना तोमैं तुम्हे बारिश की बूंदे बन कर मिलूँगामैं तुम्हे फिर मिलूँगा—-अभिषेक राजहंस

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3 Comments

  1. C.M. Sharma 08/05/2019
  2. Bindeshwar prasad sharma 08/05/2019
  3. डी. के. निवातिया 09/05/2019

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