इश्क़ अधूरा

मैंने सब बता दिया उसेजो भी था सब सुना दिया उसेउसे देख कर लगा जैसे यही है वो जिसे मैं अपना हाल सुना सकता हूँअपना राज बता सकता हूँवो बिल्कुल मेरी जैसी ही थीतभी तो मेरी उसके साथ बन चली थीइत्तेफ़ाक़ से नहीं मिली थी वोउससे मिलना तो आदत बन गयी थीजब भी फुर्सत मिलती थीहम मिल लिया करते थेकभी सामने से तोकभी-कभी व्हाट्सएप्प पे भीएक दूसरे को पूछ लिया करते थेऔर कभी-कभी तोवो मेरे ख्यालो में भी आ जाया करती थीनशा चढ़ा दिया था उसने अपनाजो उसकी एक मुस्कान पर हीबस चढ़ता जा रहा थामुझे उसकी औऱ खींचता जा रहा थापता नहीं कब और कैसेउससे मुझे पूरी दोस्ती औऱआधा प्यार हो गया थाअजीब ही हो रहा था सबकुछ हो रहा था ऐसाजिसे मैं रोक नहीं पा रहा थाया ये कहूँ की रोकना ही नहीं चाहता थाये जानते हुए भी की कुछ होने नहीं वाला था हमारा एक साथधर्म,मज़हब और जाति की बेड़ियों में जकड़कर हम जुदा होने वाले थे एक दूसरे सेहिम्मत नहीं थी ना दुनिया को बताने की इसलिएबड़ी ही खामोशी सेअपने भीतर के शोर कोएक दूसरे के भीतर ही दफ़न कर दिया थामैं रोजे रखने वाला था उसके लिएऔर वो मेरी कलाई पर मन्नत का धागा बांधने वाली थीपर सब बेकार ही हो गया है अबउस ख़ुदा ने आखिर अपने मन का ही कियाउसकी डोली कहीं और के लिए रुकसत होगीऔर मेरा कबूलनामा किसी और के साथ होगा -अभिषेक राजहंस

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  1. Bindeshwar prasad sharma 08/05/2019

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