प्रेम की गंगा – शिशिर मधुकर

किसी के सामने जा के अगर खुद को भुला दोगे एक दिन प्रेम में अपने उसे तुम भी रुला दोगे मुसीबत लाख आ जाएं जरा सा प्यार दे कर के एक बिखरे हुए इंसान को भी तुम सुला दोगेकोई तनहा सा बैठा है उमंगें हैं नहीं मन मेंउसे कुछ चैन मिल जाएगा जो तुम आ के झुला दोगेकभी जो प्यार था मेरा भीड़ में खो गया देखोअगर तुम ठान लोगे तो उसे वापस बुला दोगे बहा दो प्रेम की गंगा कि ये तन मन सकल भीगेमैल मधुकर जहाँ भी हो उसे पूरा धुला दोगे शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 08/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 08/05/2019
  2. Bindeshwar prasad sharma 08/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 08/05/2019

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