यादों के मोती – शिशिर मधुकर

असर तुमने देखा मुहब्बत का मेरी गुमां तुमको खुद पे होने लगा हैअब तुम बचोगे बरखा से कैसे बादल बरस जो भिगोने लगा है मुहब्बत के सागर में उतरा है जो भी वो लौट कर के वापस ना आया अपनी कहो तुम पानी ये गहरा क्या तुम को भी भीतर डुबोने लगा है गम और ख़ुशी दोनों उलफत में देखो बस आंख ही से बाहर को आते असुअन का पानी क्या अब निकल के रुखसार तेरे भी धोने लगा है उलफत में जो डूब जाता है पूरा उसे अपनी कोई खबर ही ना रहती क्या तेरा भी मनवा अकेले में छुप के रंगीन सपने सजोने लगा हैकभी मुस्कुराना थोड़ा लजाना अपनों से खुद का चेहरा छुपाना मधुकर ये पूछे ए मेरे हमदम क्या तू यादों के मोती पिरोने लगा है शिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. Anjali yadav 04/05/2019
    • Shishir "Madhukar" 04/05/2019

Leave a Reply