गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गीतकदली की है फूल सुहावनफल है कितना प्याराजब पककर तैयार है होतीकितना न्यारा – न्यारा।भैया कदली खाओ….भैया कदली खाओ….परी सी होती इतनी प्यारीपीली चूनर वालीखाओ तो मन है भर जातासबके लिए निराली।भैया कदली खाओ….भैया कदली खाओ….हर पूजा की शान है बनतीहर मौसम की रानीजहाँ जाइये मिल है जातीलो जितनी मनमानी।भैया कदली खाओ….भैया कदली खाओ….कच्चे – पक्के दोनों ही खाओदोनों फायदेमंदजो भी सेवन रोज हैं करतेहोते वो अक्लमंद।भैया कदली खाओ….भैया कदली खाओ….पेट भर, कब्ज दूर है करतावजन न बढ़ने देतारोग मधुमेह बस मैं रखतापाचन ठीक से होता।भैया कदली खाओ….भैया कदली खाओ….बच्चे – बूढ़े और ये जवानहै सभी की पहचानगुणकारी – उपकारी होतीरखे हम सबका ध्यान।भैया कदली खाओ….भैया कदली खाओ….दाँत नहीं है फिर भी खा लोछीलकर मुँह में डालोदेखो कितना मजा आयेगाचाहो तुम आजमा लो।भैया कदली खाओ….भैया कदली खाओ…

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 03/05/2019
    • Bindeshwar prasad sharma 03/05/2019

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