तुम हो ..सिर्फ तुम हो…

हाँ, कहना था तुमसेअपनी कई रातों के जागने का राजतुम चाँद बन गयी थी मेरीजिसे देखने के लिए मैं छत परआजकल रोज-रोज जाने लगा थावैसे तो केमेस्ट्री बिल्कुल भी पसंद नहीं मुझेपर तुम्हारे साथ अपनी केमिस्ट्री बढ़ाने के लिएमैं केमिस्ट्री भी पढ़ने लगा थाहाँ, मैं चोर ही बन गया थाऔर तुम्हे ,तुमसे चुराना मेरी ज़िन्दगी का आखिरी मक़सद बन गया थाशायद इसलिएमैं चोर नजरो से तुम्हे निहारने लगा थापढ़कर अजीब ही लगता तुम्हेअगर मेरा एक भी लिखा खतजिसमे मैंने इजहार किया था अपने जज्बातों काकाश!वो तुम्हारे पते पर पहुंच पाताहो सकता था कि तुम मुझेडांटती,फटकारती या “मुझसे दूर रहो”ऐसा कुछ कहतीसच कहता हूँतुम्हारा डाँटना भी मुझे शक्कर जैसा ही लगतातुम भले insecure फील करती मुझे तुम्हारे पीछे-पीछे आते देखकरपर जब तक तुम सही सलामत अपने घर तक नहीं पहुंचतीमैं तुम्हारा पीछा ही नहीं छोड़ताकाश! मैं तुम्हे बता देता तो क्या पता तुम भी मुझे थोड़ा-बहुत तो समझ ही लेतीकितनी दफा तुम्हे फेसबुक पर ढूंढने की कोशिश कीपर तुम शायद वहाँ थी ही नहींमैं तुम्हे बता देता कीतुम्हारा मासूम सा चेहरा नामुझे कुछ कुछ पागल सा कर गया हैऔर तुम्हारी काली-काली जुल्फों के बादल नेमुझे बेमौसम भींगा ही दिया हैतुम्हे बता देता कीजब तुम होती हो नातो सिर्फ तुम ही होती हो और जब तुम नहीं होती होतो तुम्हारा ख़्वाब होता हैमतलब तुम्हारी मौजूदगी तुम्हारे जाने के बाद भी रहती हैमुझे किसी और की दखलअंदाजीतुम्हारे मेरे बीच पसंद नहींइसलिए अपने जज्बातो को अपने भीतर ही छिपा कर रख लेता हूँआज कल तकिये पकड़ कर सोने लगा हूँक्योंकि मैं चाहता हूँअगर कोई ख़्वाब देखूं तो उसमें तुम हो.. तुम हो सिर्फ तुम हो—अभिषेक राजहंस

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 02/05/2019
  2. C.M. Sharma 03/05/2019

Leave a Reply