हम सिर्फ दोस्त है ना

पढिये मेरी नयी कहानी का पहला हिस्सा-शीर्षक-हम सिर्फ दोस्त हैं नाआज घर की साफ सफाई करते हुए मुझे एक पुराना ग्रीटिंग्स कार्ड मिला , उस कार्ड का कवर साबित कर रहा था कि वो पुराना हो चुका है ,पर जब मैंने उस कार्ड को खोल के पढ़ना शुरू किया तो मैं अपने घर के कमरे से निकलकर अतीत के सफर पर निकल चुका था ,मेरी माँ ने आवाज़ भी लगाई-मुन्नू आधा किलो चीनी दुकान से ले आ और जाने से पहले दूध का बरतन गैस से उतार देना ,पर मैं कहां उसकी सुन पाया था ,दूध पतीले से उछल कर बिखर गई थी फ़र्श पर ,गैस अपनी गति से जलता जा रहा था औऱ मैं अपनी सुध बुध खो कर ,कहीं खो सा गया था।ग्रीटिंग्स कार्ड में छपे वर्ण अपनी सीमा लांघ कर कागज के अन्य हिस्से में भी फैल चुके थे और लगभग अर्थहीन हो चले थे पर एक जगह कुछ तीन अक्षर एक साथ डटे हुए थे -“सपना” ये सिर्फ शब्द नहीं थे मेरे लिए ,मेरा अतीत था ,जिसने मेरी ज़िंदगी के अच्छे खासे हिस्से पर अपना प्रभाव छोड़ा था सपना ,वो सपना थी जिसका साथ सिर्फ सपनों तक ही सीमित रहा था मेरे साथ उसका साथ बस रेल की पटरियों की तरह रहा था ,साथ खाना ,पढ़ना ,घूमना ,गप्पे लड़ानाहम दोनों बचपन से जानते थे ना एक दूसरे को ,मेरे घर के बाजू वाले घर में ही तो रहती थीमैं बचपन में अपने नानी के यहाँ रहता था और उसके घर से मेरी नानी का रिश्ता दही-चीनी जैसा था मतलब प्यार वाला रिश्ता ,हम सब साथ-साथ पर्व त्योहार मनाते थे ,मेरी नानी और उसकी दादी भी पक्की सहेली थी ,वो दोनों साथ-साथ शाम में सोसाइटी के औरतो के साथ घूमने जाती थीमैं भी सपना के घर मे अक्सर चला जाता था ,कभी कभी तो मामा के मार से बचने के लिए भी ,वैसे मैं पढ़ने में तो अच्छा था ,पर कोई भी काम सही समय पर नही करता था ,जिसके लिए मुझे डांट भी पड़ती थी और कभी कभी मामा लगा भी देते थे एक दो झापड़, जब भी मुझे मार लगती थी तो सपना अपनी खिड़की से झाँक कर मुझे देखती रहती थी शायद उसे बिल्कुल भी अच्छा नही लगता था की मेरे मामा मुझे पीटते थे , वो मुझसे कहती भी थी कि तुम अपने माँ के यहाँ ही रहो ना ,यहाँ रह कर क्यों मार खाते हो,तो मैं कहता था मेरे मामा मुझसे बहुत प्यार करते हैं , इसलिए मेरा कुछ भी ग़लत करना उन्हें अच्छा नहीं लगता है और उनकी जो बहन हैं ना यानि मेरी माँ ,वो तो उनसे भी ज्यादा पीटती है मुझे ,उससे अच्छा है कि मैं यहीं रहूँ और यहाँ तुम भी तो है ,समझी सपना, वो मेरी बात सुन कर खिलखिला उठी और कहा कि हम दोनों हमेशा साथ रहेंगे और जब कभी भी तुम से दूर जाऊंगी ना तो तुम्हे चिट्ठी जरूर लिखूंगी ,तुम भी जब अपने गाँव जाओगे ना तो वहाँ से चिट्ठी जरूर लिखना ,मैंने सहमति में सिर अपना हिलाया था। हम दोनों एक ही स्कूल में और एक ही क्लास में पढ़ते थे ,मैं क्लास का मॉनिटर भी था इसलिए मेरी धाक भी जमती थी क्लास में ,वैसे मैं सबकी मदद कर देता था पर उसके लिए तो मेरे पास हमेशा ही वक़्त होता था ,उसके होमवर्क भी मैं ही कर दिया करता था ,पर एक दिन बेबी मैम जो इंग्लिश पढ़ाती थी ,उसका होमवर्क करते हुए पकड़ लिया था और पहली बार मुझे उस दिन किसी टीचर से पिटाई लगी थीमैंने गुस्से में आकर सपना के यहाँ जाना छोड़ दिया था और उसे कहा भी की तेरी वजह से मुझे मार लगी ,जाओ आज के बाद मुझसे बात मत करना ।अचानक माँ ने चीख कर आवाज लगाई ,मुन्नू दूध जला दिया नादेखो बर्तन जल के काला हो गया है, ध्यान कहाँ रहता है तुम्हाराऔर मेरा जो सफर चल रहा था अतीत का , जिसमे सपना थी और मैं था ,वो रुक गया था। –क्रमशऔर कहानी का पहला हिस्सा भी यही पर रोकते हैइंतज़ार करे आप जराजल्दी ही ले कर आऊंगा अगला भाग–आपका अभिषेक राजहंस

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

One Response

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2019

Leave a Reply