दोस्त – शिशिर मधुकर

एक दोस्त मुझको अच्छा मिला है पा के जिसे मेरा तन मन खिला है नहीं है ये कोई संजोग छोटा मेरी दुआओं का वो एक सिला है खुदा ने सुनी है आवाज मन की मुझे अब ना उससे कोई गिला है जरा सा जो उसने सहारा लगायासूना ना अब मेरे मन का किला हैशृद्धा और भक्ति में ताकत है ऐसी मधुकर इंसा भी बनती शिला है शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 30/04/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/04/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/05/2019

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