खामोशी

ये जो खामोशी का गांठबाँध लिया है तुमनेउसे अब सुलझा दो नाक्यों उलझी हुई हो तुममेरी उलझन को तो समझो नाअपने जज्बातों को ऐसे ना रोको तुम इसे आज़ाद कर भी दोतुम्हारी आँखों मे झाँककर मैंने पढ़ लिया है तुम्हेअब अपने लबों से इजहार कर दो नाये जो फासलें हैवो बेवजह हैडरो मत अबथोड़ा यकीन कर लो नाइंतज़ार का जो ये पल चल रहा हैअपनी चुप्पी तोड़करइसे ठहरा दो नाअब और यूँ ही तुम्हेसिर्फ देखना ही नहीं चाहता तुम्हे महसूस भी करना चाहता हूँतुम मुझे खुद में घोल दो नामेरे ख्वाबों में तो आने ही लगी हो तुमकुछ पल ज़िन्दगी के भीसाथ बाँट लो ना—–अभिषेक राजहंस

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/04/2019

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