अधूरे से सपने – शिशिर मधुकर

मुझको गले से लगा लो ना अपने तभी होंगे पूरे अधूरे से सपने खुद को भुला के ही ईश्वर मिलेगा लगते हो तुम तो बस नाम जपने लोगों को तुम में कुछ दिख रहा है समझ लो अगर नाम लगता है छपने चलो भोर में ही हम घूम आएं लगता है सूरज फिर खूब तपने ना इतना भी दूरी को तुम बढ़ाओ मधुकर का दिल जो लगे फिर तड़पने शिशिर मधुकर

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