बदलाव – शिशिर मधुकर

मुझे तुझ से कोई शिकायत नहीं है मजबूर है तू मैं ये जानता हूँ तमन्नाएं सारी ना पूरी हुई है ये सच सुन ले मैं भी तो पहचानता हूँ मैं तन्हा सफर में प्यासा बहुत था मेरी प्यास थोड़ी सी तुमने बुझाई मैं भूला नहीं हूँ वो एहसान तेरा दिलों जां से तुझको मैं मानता हूँ जो मुझको डराते हैं इल्जाम दे के वो फितरत को मेरी समझे नहीं हैं मैं कदमों को पीछे लेता नहीं हूँ जीवन में कुछ भी अगर ठानता हूँ जो चेहरा बदल के मुझे कोसते हैं वो ये भी समझ लें तो क़ुछ भला होमुझे इल्म है उनकी संगदिली का मैं मूरख की ना कोई अज्ञानता हूँ जो झुकते नहीं हैं वो टूटा किए हैं मुझे दोस्तों ने हरदम बताया मैं बदलाव लाने को लड़ रहा हूँ निरी खाक मधुकर ना मैं छानता हूँ शिशिर मधुकर

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