हाँ, मैं औरंगजेब ही हूँ

हाँ, मैं औरंगजेब ही हूँअपने पिता को घर के भीतर हीकैद कर रखा हूँमैं कोई श्रवण कुमार नहीं हूँदुनिया बहुत कुछ कहती हैऔर मैं बस सुन लेता हूँमैं अपने पिता को सुखी रोटी और दाल खिलाता हूँउनकी कम होती रौशनी को ले कर मलाल नहीं मुझेमैं उन्हें किसी से मिलने भी नहीं देताइसलिए थोड़ा निर्दयी भी हूँहाँ, मैं औरंगजेब ही हूँउन्होंने चलना-फिरना ,छोड़ रखा हैइसलिए उनकी बैसाखी मैंने तोड़ दी हैउन्होंने पढ़ना छोड़ दिया हैंइसलिए उनके ऐनक का टूटा शीशा नहीं बदल पातामैं श्रवण कुमार नहींसिर्फ उनका बेटा बन कर रहना चाहता हूँउन्होंने मुझे उँगलियाँ पकड़ कर चलना सिखायाफिर कैसे उन्हें बैसाखी दे दूँउन्होंने मुझे पढ़ाया-लिखाया तो फिर क्योंमैं उनके लिए अखबार नहीं पढ़ पाऊँउनसे मिलने वाले लोगजब कहते है-अब इस कष्ट से मुक्ति मिल जाये उन्हेंभगवान उठा ले उन्हेंसुन कर बहुत दुःख होता है मुझेमैं अपने भगवान कोभगवान के पास कैसे जाने दूँमेरे पिता ने पाला है मुझेक्या मैं अपने पिता को पाल भी नहीं सकतादुनिया औरंगजेब कहती है तो कहेमैं अपने पिता को आजाद नहीं कर सकता—अभिषेक राजहंस

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  1. डी. के. निवातिया 15/04/2019
  2. Shishir "Madhukar" 15/04/2019

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