रवायत – शिशिर मधुकर

ना तुम भूल सकते ना मैं भूल सकता अपनी मुहब्बत तो चलती रहेगी भले दूरियां बन गईं हो सफर में आशा मिलन की तो पलती रहेगीज़िंदा हो तुम भी ज़िंदा हूँ मैं भी जीवन का पहिया तो चलता रहेगा सभी कुछ मिलेगा मुझको जहाँ में कमी तेरी फिर भी खलती रहेगी ये आग लगने पे बुझती नहीं हैकोशिश करो चाहे कितनी भी मिल के ये जोत ईश्वर की पूजा सरीखी मन में हमेशा ही जलती रहेगी ये जीवन हमारा है कागज़ की नैया हमेशा बदन में ना ताकत रहेगी हर इक पल को जी लो अमृत को पी लोनौका बर्फ से ये गलती रहेगी झूठों से रिश्तों में झूठी मुहब्बत सदियों से दुनिया में हावी रही है अब तक ना बदली है कोई रवायत मधुकर ये आगे भी छलती रहेगी शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. Shubham 15/04/2019
    • Shishir "Madhukar" 28/04/2019
  2. C.M. Sharma 15/04/2019
    • Shishir "Madhukar" 15/04/2019
  3. डी. के. निवातिया 15/04/2019
    • Shishir "Madhukar" 15/04/2019

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