कशमकश 2

1 बस तुझे पाने का साथीइरादा रह गया तू मुझमें बाकीमुझसे ज्यादा रह गया2 लिखती रही तुझ सा तलाशती रहीये ज़िन्दगी तुझ बिन कागजी रही3 तेरी उन गलियों में ,जाना बेकार ही सहीफिर करके देखेगें ,झूठा इंतजार ही सही माना नहीं रहे निशान चाहतों के कूचों परफिर भी गुजरेंगे, बनकर तेरे गुनेहगार ही सही4 आतीष है जो इश्कतो धमाका जोरदार होना चाहिए हो अगर खता तो ये गुनाह हर बार होना चाहिए5 हर आजमाईस का सही से हिसाब रखीयेअपने लिए भी बचाकर कुछ ख्वाब रखीयेकब तक सजाते रहेंगे बगिया ओरों कीअपनी किताबों में फिर से गुलाब रखीये6 जाने कौन सा दौर ,चला है जमाने काहर किसी को चढा ,शौक आजमाने काचाहतें जो यूँ ही खरीदी जाती साकी क्या ज़ुनून था फिर, परवाने को जल जाने का7 यदि यूँ ही हर शब को गुमनाम होना है हर पहर को इश्क पर कुर्बान होना है तो सम्भालकर रखीये दिल अपनाआपका भी एक दिन यही अंजाम होना है 8 लड़ना है तो सामने आ फरेबों में उलझाती क्या है जरा खुलकर बता अ ज़िन्दगी आखिर तू चाहती क्या है9 किसी और से दिल लगाने को कहती हैनादान है सब भूल जाने को कहती है10 बिखरी हुई रोशनाई सेलिखने का हुनर जानता हैएक शक्स है शहर में जो रुह से मुझे पहचानता है11 जाने कितनी तल्खियों सेहिफाजत किया करती है एक नूर है जो ऐसी इबादत किया करती है। 12 कितना मासूम तेरा रश्के कमर लगता है,दिल की गहराईयों में मौजों का भँवर लगता है, साथ नहीं हो तुम ज़िन राहो में, एक कदम चलना भी सदियों का सफर लगता है13 दूधिया क्षितिज़ पर मिलती एक लकीर थी जिसकीफिरा रहे हैं त्रस्त उँगलियाँ तस्वीरपर उसकी

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/04/2019
  2. rakesh kumar Rakesh Kumar 13/06/2020

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