संवेदनाऐं

1 तेरी सादगी जीना मुहाल करती है मासूमियत भी बहुत बवाल करती हैगुजर तो जाऐं रुसवा होकर भी पर ये आँखें बहुत सवाल करती हैं2 क्या लिखूँ तुझपर हर जज़्बात भूल जाता हूँ तेरी तस्वीर को देखकर ख्यालात भूल जाता हूँखफा सी हो गई है कलम ये जानकरनाम क्यूँ एक ही लिखता और मिटाता हूँ3 जिंदगी तेरा जस्न मनाया नहीं हमनेसिर्फ भुगता है बताया नहीं हमनेकैसे कह दें जी लिए बहोतजो चाहा कुछ भी तो पाया नहीं हमने4 अक्सर बेमानी कर देता है जमाना सब निभाने के बाद भीएक तुम हो जो ओझल होकर रुहानी लगते होमिटा देते हैं लोग निशानसिद्त से की कोशिशों के भीऔर तुम मुझपर लिखी हरहर कहानी लगते हो5 जब कभी मुस्कुराना भूल जाता हूँ मैं तेरी तस्वीर उठाकर ले आता हूँ मैं6 रग रग जर्रा जर्रा गुनाह कर जाती हैदिल के सकून को तबाह कर जाती है जो कर सकती नहीं आँधियाँ भीवो सबकुछ तेरी एक अदा कर जाती है

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