हाँ, मैं अब बदल गया हूँ

हाँ, मैं थोड़ा बदल गया हूँपहले से थोड़ा संभल गया हूँसीख गया हूँ चालाकियाँकाम के लिए ही बढ़ाता हूँ नजदीकियाँदिल ना टूटे फिर से शीशे जैसाबस इसलिए आईने में झांकनाछोड़ दिया हूँचेहरा तो अब भी वही हैपर उसपे नक़ाब ओढ़ना सीख लिया हूँअपने मतलब के लिएमतलबी मुस्कान बिखेरना सीख गया हूँशतरंज की बिसात पेअपने मनमाफिक का घोड़ा दौड़ाना सीख गया हूँअब कोई और उलझाने की कोशिश ना करेखुद का जाल बिछाना शुरू कर दिया हूँअब कोई और फंसा के दिखाए जरारस्सी से फांसी का फंदा बनाना सीख गया हूँअब किसी पे ऐतबार नही करता मैंभावनाओं के समंदर में डूबना भूल गया हूँहाँ, मैं अब मेरे जैसा नहीं रहाअब दुनिया जैसा बन गया हूँ–अभिषेक राजहंस

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/04/2019

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