बज्म की रौनक – शिशिर मधुकर

जिंदगी में कहीं कमी सी है आँख की कोर में नमी सी है नीर बहता रहे तो प्यास बुझे बर्फ हर ओर कुछ जमी सी है वो चलता रहा तो अजीज सबको था समय की चाल कुछ थमी सी है अभी ना जाओ सुनो थोड़ी देर तो बैठो नज़र ये मेरी अभी तुझ में कुछ रमी सी है ओ मेरी बज्म की रौनक मैं तुझे कैसे कहूँ तेरे बिना वहाँ मधुकर फकत गमी सी है शिशिर मधुकर

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  1. bhupendradave 07/04/2019

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