वस्ल के वो पल – शिशिर मधुकर

प्यार दिल से जो करते हैं वो ख्यालों में आते हैं झूठे इंसान इस जग में मुझे बिल्कुल ना भाते हैं भले तुम जी रहे हो बेधड़क सब कुछ भुला के आज मुझे तो वस्ल के वो पल मगर अब भी सताते हैं बोझ टूटे हुए दिल का सम्भाला है कभी तुमने मेरे काँधे तो अब इस बोझ को हर पल उठाते हैं कमी तेरी नहीं फितरत ही क्यों ऐसी बनी मेरी लगाया जिस किसी से दिल उसे मर के निभाते हैं मुझे उम्मीद है पत्थर भी ये शायद पिघल जाए बिना नागा किए तब ही तुझे मधुकर बुलाते हैं शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/04/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/04/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/04/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/04/2019

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