कसक – शिशिर मधुकर

कसक मिलने की दिल में है मगर मैं आ नहीं पाती गीत अधरों पे ठहरे हैं उन्हें मैं गा नहीं पाती मेरे जीवन के मसले भी मेरे केशों से उलझे हैं लाख कोशिश करूँ फिर भी मैं उनको बा नहीं पाती मैंने दिल दे दिया जिसको वो भी मिलने को प्यासा है मगर मैं चैन दिल का साथ उसके पा नहीं पातीलाख कोशिश करी मैंने ख़ुशी दामन में हो तेरे मगर मुस्कान चेहरे पे मैं फिर भी ला नहीं पाती कभी सोचा कि तुझको भूल कर एक ओर हो जाऊंमगर मधुकर को तन्हा छोड़ कर मैं जा नहीं पाती शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 06/04/2019
    • Shishir "Madhukar" 06/04/2019

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