इश्क़ की हद्द से…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब असरार-उल-हक़ मजाज़ साहिब की ग़ज़ल है….”अक़्ल की सतह से कुछ और उभर जाना था ….  इश्क़ को मंज़िल-ए-पस्ती से गुज़र जाना था”… इसी ज़मीन में लिखी ग़ज़ल आपकी नज़र….)इश्क़ की हद्द से मुझे यूं भी गुज़र जाना था….पर नज़र तेरी खुदा हो न उतर जाना था….राज़ की बात कहूँ तुझसे ए मेरे दिलबर….मैं जफ़ा तेरी से बिखरा न बिखर जाना था….मौसमे इश्क़ की फ़रियाद कहे दिल मेरा….मर लिया उसपे कभी खुद पे भी मर जाना था….राह-ए-इश्क़ मशवरा-ए-दानिस्ता ‘चन्दर’…भूल कर भी न तुझे ले के बिसर जाना था….हुस्न-ओ-इश्क समर में उलझ गया ‘चन्दर’…नासमझ इश्क़ में जीना ही तो मर जाना था….\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/03/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 29/03/2019
  2. vijaykr811 vijaykr811 27/03/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 29/03/2019
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/04/2019
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 06/04/2019

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