सनम बेवफा-शिशिर मधुकर

ना तुम याद करते ना मैं हूँ परेशांलगता है हमको कोई ग़म नहीं हैवो कसमें वो वादे हवा में उड़े हैं मुहब्बत में अपनी कोई दम नहीं हैना तुम दोगे धोखा ना सब एक से हैंयही सोच मैंने दिल को लगायामगर सच ये अब तो नज़र आ रहा हैसनम बेवफा तू भी कुछ कम नहीं हैदिल में तड़प कोई तेरे जो होती चेहरे से कुछ तो बयां हो ही जाती झांका जो तेरी आँखों में मैंने कोना वहाँ पे कोई नम नहीं हैये माना उजाला कम हो रहा है सब कुछ ना मुझको नज़र आ रहा हैजो तुम हाथ अपना आगे करोगे मैं पकड़ूं ना उसको निरा तम नहीं हैकभी चाहतों का समुन्दर उडेलाकभी दीद के भी लाले पड़े हैं ये कैसी मुहब्बत करी उसने मधुकरनज़रिया ही जिसमें एक सम नहीं है शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. C.M. Sharma 27/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 27/03/2019
  2. vijaykr811 27/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 27/03/2019
  3. Manjusha 27/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 27/03/2019

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