“किसी के” :-विजय

किसी के अश्कों के बूंदों नेरक्तो का सैलाब बहाया हैकिसी की लेती सिसकियों नेकितनो को लाश बनाया हैकिसी के रुंधे स्वर नेकितनो को मौन कराया हैकंपकपाती हस्तो ने कितनो को भीख मंगवाया हैकिसी के मुरझे चेहरों ने कितनो का चमन उजाड़ा हैउलझे हुए काले केशो ने कितनो का जीवन उलझाया हैकिसी के चीर के चीथड़ों नेकितनो का छाती चिड़वाया हैहरण हुए किसी के अस्मत नेकितनी बार कुरुक्षेत्र सजाया है

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/04/2019
  2. vijaykr811 vijaykr811 02/04/2019
  3. Abhishek Rajhans 04/04/2019
    • vijaykr811 vijaykr811 04/04/2019

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