जिन्दा हूँ मैं :-विजय

लाश नही हूँ मैं,
पर लाश से कम नही
पिंजरे में तड़पता,परिंदा हूँ मैं
हाँ, जिन्दा हूँ मैं

दिल नही अब मेरे पास
धड़कन में भी न रही वो बात
ऊँची डाल पर झूलता,फंदा हूँ मैं
हाँ, जिन्दा हूँ मैं

पता मेरा बदकिस्मती के पास
ढूंढ बार-बार पहुँचती मेरे द्वार
बड़ा बदनसीब,बंदा हूँ मैं
हाँ, जिन्दा हूँ मैं

वफ़ा न मिला वफ़ा के बदले
जिसको चाहा खुदा के बदले
इंसान न,समझा दरिंदा हूँ मैं
हाँ, जिन्दा हूँ मैं

रौशनी नही अब मेरे जीवन में
घोर अँधेरा घर कर गया अब मन में
ग्रहण लगा,चन्दा हूँ मैं
हाँ, जिन्दा हूँ मैं

लूटा है मुझको सबने मिलकर
लुटा हूँ सब में मैं हँस-हंसकर
लुटेरे कहे फिर भी,नंगा हूँ मैं
हाँ, जिन्दा हूँ मैं

4 Comments

  1. C.M. Sharma 29/03/2019
    • vijaykr811 29/03/2019
  2. डी. के. निवातिया 02/04/2019
    • vijaykr811 02/04/2019

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