चलो,आज बता ही देता हूँ

चलो,आज बता ही देता हूँकब से दबाकर रखा हूँअपने जज्बातों पे कुंडी लगाकरआज उसे आजाद कर ही देता हूँउकेरी जा चुकी थी तुमऔर तुम्हारा साथमेरे हाथ की लकीरों मेंशायद इसलिए तुमसे मिलना इत्तेफ़ाक़ नहीं थादेखो, इतना आसान भी नहीं था मेरे लिएतुम्हे अपने भीतर शामिल कर पानादो साल होने को आये हैहर रोज, तुम्हे देखकर जो ख्याल आते थेचलो,आज बता ही देता हूँहाँ, पहली नजर में ही अच्छी लगी थी तुममैं चाहता तो था कि कुछ कहूँ तुम्हेपर कभी सही मौका नहीं मिलातो कभी हिम्मत जुटा न पायाआज थोड़ा सी हिम्मत जुटा करतुम्हे बता ही देता हूँ,देखो, मुझे सच में नही पता था कीतुम भी मुझे नोटिस करती थीपर हाँ, जब से तुम दिखी नामैं बस तुम्हे देख कर लिखने लगा थाअपने आप को बहुत बड़ा कवि या शायर समझने लगा थातुमसे हुई बातें,मुलाकातेंसब अपनी आँखों मे कैद करने लगा थातुम्हारा मुस्कुराना,अपने बालों में उँगलियाँ घुमानासब नोटिस करने लगा थासोचा नहीं था कभीतुमसे दोस्ती हो पाएगी मेरीतुमसे कह पाऊंगा ये सबपर आज,जब तुम समझने लगी हो मुझेऔर मैं भी महसूस करने लगा हूँ तुम्हे तोफिर बता ही देता हूँचलो,आज बता ही देता हूँ–अभिषेक राजहंस

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/03/2019

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