घाव तन्हाई का- शिशिर मधुकर

मुहब्बत का सुकूँ सबको कहाँ जीवन में मिलता हैं चमन पा लेने भर से तो ना उसमें फूल खिलता हैं उमंगे मर चुकी जिनकी और जहाँ जोश ठण्डा होउन्हें अपनों ने तोड़ा है तभी इतनी शिथिलता है देख लो इस ज़माने में फ़कत आगे बढेगा वोदिल की दीवार में जिसकी बसी सारी कुटिलता हैमुहब्बत की हवाएं ही सुकूँ बागों को बांटेंगीबिना इनके चले देखो कोई पत्ता ना हिलता हैघाव तन्हाई का गहरा बना हो जिस जगह मधुकरलाख कोशिश करो खुद से ही वो थोड़े ही सिलता है शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 19/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2019
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 19/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/03/2019

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