मज़बूर – शिशिर मधुकर

चोट तुझको ना लग जाए दर्द सा मुझको होता हैमुहब्बत जो भी करता है चैन अक्सर वो खोता हैमैं तो मज़बूर हूँ खुल के ये सच बतला नहीं सकतीतेरी बातों को हरदम याद कर मनवा ये रोता है मुझे बारिश की बूँदों ने यहाँ अक्सर भिगोया थातेरे संग प्रेम नदिया में लगाया मैंने गोता हैदिलाने राह फूलों की मुझे कांटे चुने तुमने असल है प्यार तेरा ये चना बिल्कुल ना थोता है ये गलती हो गई मुझसे जो सोचा साथ सब देंगे वरना मधुकर कोई राहों में खुद कांटे ना बोता हैशिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/03/2019

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