मुहब्बत का सूरज- शिशिर मधुकर

ना तुम साथ में हो ना खुशबू तुम्हारी ये जीवन कहो अब कैसे कटेगामुहब्बत का सूरज जो छुप सा गया है अँधेरा ये मन का कैसे छंटेगाप्यार उमडा था दिल में तुम्हारे लिए जो वो अब तक वहीं पे ठहरा हुआ है अगर तुम ना आओगे नज़दीक मेरे निकल के वहाँ से ये कैसे बँटेगाभुला देगा सब कुछ समय का ये पहिया तुम भी अगर इस तरह सोचते होमेरा प्यार है ये समुन्दर के जैसा पानी ना इसका बिल्कुल घटेगाजिसे खुशियाँ मिलती हैं पहलू में तेरे वो राहों को तेरी तो देखा करेगामिलेगी ना जो उसको आकर के तू तो फ़कत नाम तेरा वो हरदम रटेगाबरसने दो मुझको ना तुम वेग रोको मैं मन में दुखों को समेटे हुए हूँना जाने वहाँ फिर क्या कुछ मिटेगा जहाँ बदरा मधुकर ये एकदम फटेगा शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/03/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/03/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/03/2019

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