औरों की खातिर – शिशिर मधुकर

जो अपना ना बने मन से उसे भी कहना पड़ता हैज़िन्दगी को चलाने को साथ में रहना पड़ता हैकोई भी चोट लगती है दर्द तो लाज़मी होगादवा दारू खूब कर लो उसे पर सहना पड़ता हैदर्द इस धार के भी तो सदा दिल में रहे होंगे देख लो औरों की खातिर इसे पर बहना पड़ता हैकोई मिट्टी का टीला हो या ढेरी कोई मैं की बोझ बढ़ जाए जिसका भी उसे तो ढहना पड़ता हैजो जिसके पास है मधुकर वही बस काम आएगा सर्प का देख लो शिव को बनाना गहना पड़ता हैशिशिर मधुकर

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7 Comments

  1. C.M. Sharma 14/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 14/03/2019
  2. डी. के. निवातिया 14/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 14/03/2019
      • डी. के. निवातिया 14/03/2019
        • C.M. Sharma 15/03/2019
          • डी. के. निवातिया 15/03/2019

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