दुल्हिन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चूड़ी कंगन हाथ में , गजरा शोभे माथकन बाली है सोभती , बिंदी पायल साथ।

घूंँघट में बैठ जब गयी , तब आई मुस्कानरूप सलोना दिख गया , देखा सो हैरान।कजरा कुमकम दे गया, दुल्हिन की सौगातपिया मिलन की आस है, आज रात की बात।बाबुल का कुछ ख्याल है, माँ की ममता साथबचपन का है घर छुटा, छुटा भाई का हाथ।बहती काजल आँख की, सहती है बिछड़ावहिम्मत देते हैं सभी, रखना मत अलगाव।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/03/2019

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