शहीद के. मनोज पाण्डे

प्रणाम करो इस धरती को, ये धरती बड़ी सौभागी हैं।ये मनोज पाण्डे की जननी हैं। ये उनके शोर्य की दर्शी हैं।वो कारगिल का रण यारो, दुश्मन शिखर पर चढ यारो।गोले बरसाऐ जाता था, मुश्किल बड़ा था छन यारो।पर अपने ये थे जावाज बड़े। जा पहुचे दल संग दे चकमे।वो रोद्र रूप को धारे थे। एक ने दस दस को मारे थे।कई गोली भेद गई छाती , लहू से लाल हुई घाटी।पर कहा वो रुकने वाले थे , कई दुश्मन और मिटाने थे।धमनियों में बचा था रक्त नहीं, धड़कन कहती थी अब वक़्त नहीं।वो फिर भी लड़ते जाते हैं,आखिर तिरंगा लहराते हैं।मै कैसे करू उनका शोर्य ब्या, कर पाउ न एैसा शब्द बना।बस चूम लो इस मिट्टी को, इस मिट्टी मे है उनका खून मिलामां की ममता ने सलाह दिया, बेटा रण मे पीछे रहनाआगे भेज सिपाही को, अपनी तुम रक्छा करना।वो मुश्काए फिर पूछ परे, बताओ मॉ तुम क्या करती।क्या रण मे मुझे आगे रखती, या पहले बला खुद पे सहती।मॉ सुनते ही झट बोल परी,मै कैसे बेटा आगे करती।वो बोले सिपाही मेरे बेटे है। फिर मै कैसे आगे कर दू।वो कहते थे अपने साहब से, सर एैसा हो मेरा कार्य स्थल।शोर्य दिखाना चाहता हू , नामुमकिन को कर दुगां सफल।मै मौत को ही मार डालुंगा, जो कार्य सिद्धी से आई पेहले।बचपन से एक ही सपना है, बस परमवीर चक्र मुझको मिले।जब दिया शहादत यौद्धा ने, चितकार परी ये धरती थी।आसमान भी रोया था, पाताल भी बड़ी तरपी थी।हम जीत सके जो कारगिल को, उसमे इनका है काम बड़ा।उस परमवीर प्राक्रमी पर , भारत को हैं अभिमान बड़ा।जब पहुचें होंगे वो प्रभू के घर,वो सीहासन छोर आए होंगे।उनकी श्वागत की खातिर ,वो भी पल्के बिछाए होंगे।मै गाया कीर्ती तो क्या गाया दुश्मन भी कीर्ती गाते है।एैसे महान योद्धा के नाम स्वत: शीश झुक जाते हैं।

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 11/03/2019
  2. Bindeshwar prasad sharma 09/04/2019

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