ये तो हद हो गयी ना

जब पहली बार तुम्हे देखा थाबेहद ही करीब से देखा थाबहुत ही खूबसूरत लगी थी तुमअरे तुम कहां दिखी थीदिखी तो तुम्हारी बस बड़ी-बड़ी आंखे थीतुम तो हद थीमुझे देख कर भी अपना वो दुपट्टाजिसे तुमने हेलमेट की तरहअपने चेहरे से चिपका रखा थाउसे नहीं उतारा थाहद था मैं भीतुम्हारे आँखों मे झाँक कर हीतुमसे इश्क़ करने लगा थापहली मुलाकात में बसइतना ही कुछ हो पाया थापर तुम्हे देखने का सिलसिलाअभी रुका नहीं थाहद तो पार कर ही गया था मैंतुमसे पूछे बिना,तुम्हारी आँखों सेपहली नजर का प्यार करने लगा थातुमसे दूसरी बार मुलाकातअपने कॉलेज के बाहरगुपचुप के ठेले के पास हुई थीतुम वहाँ अपनी दोस्तों के संगगुपचुप खाने वाली थीआज पक्का तुम मुझे दिखने वाली थीऔर जो तुम एक बार दिखी नाआईना शर्मा जाएकुछ ऐसी ही दिखी थीऔर वो गुपचुप का स्वादमुझे मीठा लगने लगा थाये तो हद है न यारजिधर भी देख रहा थाबस तुम्हे ही देखने लगा थाएक दिन मौका मिल ही गयाआखिर कुछ कहने का तुमसेजो मन मे था जाहिर करने का तुमसेकॉलेज के अंतिम दिन मेंतुमने सामने ही खड़ी थीअपने खुले बाल के संगमैं भी बड़ी हिम्मत जुटा करतुम्हारी औऱ बढ़ चला थाआज सब उड़ेल देना चाहता थाजितना शायद तुमने भी महसूस किया थासब आज जाहिर कर देना चाहता थापर ये तो हद हो गईजुबां फिर से नाकाम हुईऔर आँखे तुमसे मिल न पायीतुम चली गई एक बार फिरउसके बाद न तुम दिखीऔर ना तुम्हारी बड़ी-बड़ी आंखे –अभिषेक राजहंस

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  1. Shishir "Madhukar" 14/03/2019

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