आब के जैसा – शिशिर मधुकर

तू जब भी पास होता है समय ये थम सा जा हैतेरी बातों में मेरा मन अचानक रम सा जाता हैदर्द मेरे भी दिल में था सुकूँ पर ना दिया रब ने मिला है तू मगर जब से हुआ ये कम सा जाता हैमिला जो तू मुकद्दर से खुशी इतनी मिली मुझकोये आंसू आँख को मेरी करे अब नम सा जाता हैमुहब्बत में लहू बन के तू जो नस नस में आ बैठा ख्याल अब तो जुदाई का निकाले दम सा जाता है रिश्तों को समझ मधुकर फ़कत एक आब के जैसामिले ना प्यार की गर्मी तो पानी जम सा जाता हैशिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. डी. के. निवातिया 11/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 12/03/2019
  2. C.M. Sharma 11/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 12/03/2019
  3. Rajeev Gupta 12/03/2019
    • Shishir "Madhukar" 13/03/2019

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