सैनिक वीर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

चिथड़े – चिथड़े उड़ गये, खून की बह गयी नदियाँफूट  पड़ा  ज्वालामुखी , दहल  गयी  सब  सदियाँ।कैसा  षडयंत्र  है  तेरा  , वार पीठ पर करने काडर लगता क्यों तुमको, सामने आकर मरने का।पुलवामा  में हरकत से , तुमने आग लगाईअजहर मसूद अपने , दामन में दाग लगाई।छुपे  हो  पाक  में जाकर, बुजदिलों के डेरे मेंआ गयी तुझ पे सामत , फंस गये अब घेरे में।तुम जैसा मुल्ला साथी , सब मारे जाओगेअंतरराष्ट्र  घेरेे  से  ,नहीं  तुम  बच पाओगे।माता का दिल विरक्त हुआ , और ममता रोई हैबाप  विषाद में डूबा, पत्नी – पति  को  खोई है।बादा  करके  चल  दिये , होली में घर आऊँगाअपने मुन्ना, बहना का, तौफा नया ले आऊँगा।प्रीतम की इक याद लिये, सैनिक वीर चला गयाघर के एक  छलिया से, वीर सिपाही  छला गया।बंधन – क्रंदना  में  है  डूबा , अपना  हिन्दुस्तानबदला चून – चून कर लेगा, सुनो खोलकर कान।

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