मेरी याद तो आती रहेगी  ……   भूपेन्द्र कुमार दवे

मेरी याद तो आती रहेगी मेरे जाने के बाद मेरी याद तो आती रहेगीआँसू की ओट से चुपके छिपाती वो आती रहेगी। मुरझाये हुए फूलों से तो पूछकर देखोबहार हर साल हर सूरत तो आती दिखेगीनदियाँ सूखकर कभी निर्जल हुआ नहीं करतीकलेजा रेत का चीरो नमी उसकी दिखेगी संजोकर रखी होती है याद जो, वो आती रहेगीआँसू की ओट से चुपके छिपाती वो आती रहेगी। कलियाँ थीं तो भौरे थे गुनगुनाते हुए थेअब याद उनकी खुश्बू तरह मँड़राती दिखेगीये सूनापन ये सन्नाटा भी चुप नहीं रहताहर आहट पे ये खामोशी भी जागी दिखेगी हर साँस में छिप वह रिछाने आस को आती रहेगीआँसू की ओट से चुपके छिपाती वो आती रहेगी। बैठकर हर नाव को जरा आते हुए देखोहर पतवार थामे याद सलोनी ही दिखेगीऔर समन्दर की ऊँची उमड़ती लहरों तलेहर चुनमुनी-सी याद कसमसाती-सी दिखेगी टूटी सीपियों में भी छिपती हुई वो आती दिखेगीआँसू की ओट से चुपके छिपाती वो आती रहेगी। याद की मखमली दूब पर दो कदम तो चलोमुस्कराहट के साथ जिन्दगी चलती दिखेगीगर्म आहों के हृदय पर अश्रू जब जब गिरेंगेकुनमुनाती याद में ठंडक मधुर-सी दिखेगी दूर उसको जितना करोगे पास वो आती रहेगीआँसू की ओट से चुपके छिपाती वो आती रहेगी।                                   ……   भूपेन्द्र कुमार दवे              00000

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