चेहरा – शिशिर मधुकर

शर्म और हया से लबालब ये चेहराकोई राज़ देखो तो कहता है गहरानज़रें झुकी हैं और मन में खुशी है लगाया है सीने पे गहनों का पहराये साड़ी का पल्लू गज़ब ढा रहा है किनारी का प्यारा लगे रंग सुनहराये जुल्फों के बादल माथे की लाली जो देखा इन्हें तो समय आ के ठहरालबों की ये मुस्कान सब कह रही है जो इसको सुने न वो मधुकर है बहराशिशिर मधुकर

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