प्रेम मुजरिम :-विजय

जिंदगी की आग मेंझुलसता रहा हूँ मैंतेरी प्रेम की बारिश काबहुत इंतजार किया हूँ मैंडर है मुझको तुझे खो न दूँ मैंकारण इस डर केखता कर गया हूं मैंतेरे आँखों के मोती कामुजरिम बन गया हूं मैंसजा जो दे तू मुझकोउसका सज़दा करूँगा मैंकायम रहे तेरे होठों की हँसीयही दुआ करता हूँ मैंरूठना ना फिर कभी तूवर्ना जिंदगी से रूठ जाऊँगा मैं

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2 Comments

  1. DEVESH DIXIT 13/03/2020
    • vijaykr811 13/03/2020

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