तुझमें मेरी दुनिया

थोड़ा सा विचलित हूँ मैं, थोड़ा सा उदास हूँ।दूर भले मैं तुझसे रहूँ, लेकिन दिल के पास हूँ।याद तेरी जब जब आती है, दिल मेरा बस रोता है।खड़ा रहूँ मैं भीड़ में कितना, हरपल तुझको सोचा है।कैसे समझाऊँ मैं तुझको, कैसे ये बात बताऊंगा,तू नहीं जो इस जीवन में, तनहा मैं रह जाऊँगा।आंख की बातें काश तू समझे, बतलाने से घबराता हूँ,ख्वाब टूट जाए न मेरा, दिल को मैं समझता हूँ।इक छोटी सी दुनिया है मेरी, तू भी उसमें शामिल है।कांटों भरे सफर की मेरी, तू ही तो बस मंजिल है।रूठ न जाना मुझसे तू, बस इतना मैं चाहूँगा।चलती रहेंगी जब तक सांसे, वादा अपना निभाऊंगा।माना मुझमें कमियाँ बहुत है, लेकिन इक इंसान हूँ,हर तरफ खामोशी है, थोड़ा सा परेशान हूँ।नफरत की इस भीड़ ने तो, मुझको तनहा कर दिया,जीवन की इस डोर मेंं मैंने, ज़हर ग़मों का है पिया।तू दिल की रानी है मेरी, मैं तो तेरा दास हूँ,थोड़ा सा विचलित हूँ मैं, थोड़ा सा उदास हूँ।

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2 Comments

  1. Devesh Dixit 15/02/2019
    • Ravi Srivastava 17/02/2019

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