पास हो तुम – शिशिर मधुकर

पास हो तुम दिल के इतने कैसे मैं तुमको छोड़ दूँजिसमें हैं बस छवियां तेरी वो आईना क्यों तोड़ दूँअविरल धार स्नेह की जो बहती है जानिब तेरेइसका रुख क्यों गैरों के मैं कहने भर से मोड़ दूँ प्रेम का रिश्ता ये हरगिज़ ख़त्म हो ना पाएगातू कहे तो एक नाम देकर सम्बन्ध अपना जोड़ दूँहाथ कोई गर तुझे छूने की हिम्मत भी करेबाँह ऐसे शख्स की मैं कुछ सोचे बिन मरोड़ दूँमधुकर कहे जो सुख उसे मिलता है तुमसे बात करखूं की हर एक बूँद अपनी तेरी खुशियों पे निचोड़ दूँशिशिर मधुकर

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