चालाक नेता

एक नेता बड़े चाव सेसब्जी – रोटी खा रहा थारहा नहीं गया हमसेतो पूछ ही डालानेता जी चारा खोरी का इल्ज़ाम था आप पर तोफिर सब्जी – रोटी कैसे खा रहे होदेश को काला बाजारी सिखा रहे होये उल्टी गंगा कैसे बहा रहे होवे बोले बालक चारा खोरी किसे कहते हैंइसके लिए अभी नादान होमाया नगरी किसे कहते हैंइस बात से अभी अनजान होचारा खोरी – अरे चारा खोरी ही तो धन कमाने का जरिया हैयही तरीका तो  सबसे बढ़िया हैवर्ना तो जिंदगी में रखा ही  क्या हैहमने कहा आप तो गज़ब करते हैंइंसानों के साथ-साथ मवेशियों को भी शामिल करते हैंतो दोनों में कोई अंतर नहीं करते हैंवे बोले हाँ बालक हमारे लिए सब समान हैजब धन के लिए बाप को नहीं छोड़ा हैतो सत्ता के लिए कुर्सी कैसे छोड़ेंऔर फिर मवेशी भी तो इंसानों का भोजन लेते हैंहमने ले लिया तो कौन सा गुनाह करते हैंऔर तुम ही बताओ ये कैसे मवेशी हैंये कौन सा इन्साफ करते हैंजहाँ मिली नहीं फल आदी की रेडीकी वहां मुँह उन्होंने डाला नहींमैंने कहा हैं तो वे मवेशी हीआप तो नहींअजी यही तो हमारी चालाकी हैदिमाग की क्या गारंटी हैवाकई ऐसा लग रहा था जो कहा उन्होंनेये उनकी मुर्खता नहीं चालाकी है देवेश दीक्षित7982437710

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply