प्रीत के बिन – शिशिर मधुकर

तुम्हारी प्रीत के बिन तो बड़ा मुश्किल ये जीना हैमुझे तो ज़िन्दगी का जाम नज़र से तेरी पीना हैना मेरे मर्ज को समझा ना मेरे दर्द को समझाबड़ी बेरहमी से तुमको उन्होंने मुझसे छीना हैदिन भी लम्बे हुए हैं कुछ और तू पास ना आए मेरे किस काम का खिलता बसन्ती ये महीना हैमेरी उजड़ी सी दुनिया देख वो ही मुस्कुराएगापतंग जिसकी चढ़ी ऊँची अभी तक भी कटी ना हैजहाँ में कुछ भी मिल जाए मगर ये जान ले मधुकरमुहब्बत के बिना जीवन में रहती कोई खुशी ना हैशिशिर मधुकर

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