हमारी हम, तुम्हारी तुम जानों – डी के निवातिया

हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों

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!तुम में रमते हम और हम में तुम होये एहसास-ऐ-दिल कभी तो पहचानोंसच, करीब कितने है हम एक दूजे के,हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों !!

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रोज़ देते हो दस्तक दिल खट-खटाते होआकर याद, वक्त -बे- वक्त, सताते होक्या करते हो, कुछ, ऐसा, महसूस कभी,हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों !!

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बदलते मौसम की चंचल शौख अदाबयान करती है दास्ताँ तेरे हुस्न कीक्या हवाओं के रुख को पहचाना कभी,हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों !!

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सच है की हम गैर सही नजरो में उनकीफिर भी कोई तो रिश्ता बाकी है जग मेंभरोसा दिल पे खुद के करना जानो कभी,बाकी हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों

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स्वरचित: डी के निवातिया

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/02/2019
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/02/2019

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