सलीम रज़ा रीवा की 101 ग़ज़लें – gazal’s of salimraza rewa

#salimrazarewa #salim-raza-rewa #qita #muktak #behtreen #shayri #sher #gazal #urdushayri_________________________ Nov-19रुख़ से जो मेरे यार ने पर्दा हटा दियामहफ़िल में हुस्न वालों को पागल बना दियाउसके हर एक अदा पे तो क़ुर्बान जाइएमौसम को जिसने छू के नशीला बना दियाउंगली में नचाती है ये कमबख़्त मोहब्बतमजनू बना दिया कभी लैला बना दियाआई बाहर झूम के ख़ुश्बू बिखेरतीज़ुल्फें उड़ा के सबको दीवाना बना दियामहफ़िल में होश वाले भी मदहोश हो गएमख़मूर निगाहों से क्या जादू चला दियादेखा जो उसने प्यार से बस इक नज़र ‘रज़ा’दिल में हमारे प्यार का गुलशन खिला दिया_________________________ Oct-19अपने हर ग़म को वो अश्कों में पिरो लेती हैबेटी मुफ़लिस की खुले घर मे भी सो लेती हैतब मुझे दर्द का एहसास बहुत होता हैजब मेरी लख़्त-ए-जिगर आंख भिगो लेती हैमैं अकेला नहीं रोता हूँ शब-ए-हिज्राँ मेंमेरी तन्हाई मेरे साथ में रो लेती हैअपने दुःख दर्द को मैला नहीं होने देतीअपनी आँखों से वो हर दर्द को धो लेती हैजब भी ख़ुश होके निकलता हूँ ‘रज़ा’ मैं घर सेमेरी मायूसी मेरे साथ में हो लेती है_________________________Oct-19चमक रही है फ़जाओं में चांदनी अब तकतुम्हारे दम से ही रौशन है रौशनी अब तकउमड़ रहा है समुंदर मेरे ख़्यालों काटपक रही है निगाहों से रौशनी अब तकमेरे बदन का लहू ख़ुश्क हो गया होताअगर न होती मेरे जिस्म में नमी अब तकउछल-उछल के ख़ुशी नाचती थी आँगन मेंखटक रही है उसी बात की कमी अब तककि जिसके हुस्न का चर्चा था सारे आलम मेंभटक रही है वो गालियों में बावरी अब तकहसीन जाल मोहब्बत की फेंक कर मुझपेवो कर रहा था मेरे साथ दिल लगी अब तकतुम्हारी याद से रौशन है प्यार की गालियांतुम्हारे दम से मुनौवर जिंदगी अब तक_________________________ Oct-19रौशन है उसके दम से सितारों की रौशनीख़ुश्बू लुटा रही है बहारों की रौशनीइक वो है माहताब फक़त आसमान मेंफीकी है जिसके आगे हज़ारों की रौशनीतुम क्या गए कि चांदनी बे लुत्फ़ हो गईचुभती है क़ल्ब ओ जां में सितारों की रौशनीउस घर से दूर रहती हैं हरदम मुसीबतेंजिस घर में हो क़ुरान के पारों की रौशनीक्या जाने किस ग़रीब पे ढाएगी ये सितमपागल सी हो गई है शरारों की रौशनी_________________________ Oct-19हौसला जिसका मर नहीं सकतामुश्किलों से वो डर नहीं सकतालोग कहते हैं ज़ख़्म गहरा हैमुद्दतों तक ये भर नहीं सकताजब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहेबद-दुआओं से मर नहीं सकताजिसने महदूद ख़्वाहिशें कर लीकोई लालच वो कर नहीं सकताउनकी आदत है यूँ डराने कीमेरी फ़ितरत है डर नहीं सकताउनकी आदत है मुकर जाने कीमैं कभी भी मुकर नहीं सकतालाख फ़ितरत की ज़ुल्फ़ सुलझाओबिगड़ा ख़ाका सुधर नहीं सकता_________________________ Oct-19सुख उसका है दुख उसका है तो काहे का रोना हैदौलत उसकी शोहरत उसकी क्या पाना क्या खोना हैचाँद-सितारे उससे रौशन फूल में उससे खुशबू हैज़र्रे-ज़र्रे में वो शामिल वो चांदी वो सोना हैसारी दुनिया का वो मालिक हर शय उसके क़ब्ज़े मेंउसके आगे सब कुछ फीका क्या जादू क्या टोना हैगॉड ख़ुदा भगवान कहो या ईश्वर अल्लाह उसे कहोवो ख़ालिक है वो मालिक है उसका कोना-कोना हैखुशिओं के वो मोती भर दे या ग़म की बरसात करेवो मालिक है सारे जग का जो चाहे सो होना हैइक रस्ता जो बंद किया तो दस रस्ते वो खोलेगाउसपे भरोसा रख तू प्यारे जो लिक्खा वो होना हैसाँसों पे उसका है पहरा धड़कन उसके दम से हैजिस्‍म ‘रज़ा’ है मिट्टी का तो क्या रोना क्या धोना है_________________________ Sep/19 (85)मेरी आँखों में हुआ जब से ठिकाना तेरालोग कहते हैं सरे आम दिवाना तेरारोज़ मिलने की तसल्ली न दिया कर मुझकोजान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेराछीन लेगा ये मेरा होश यकीनन इक दिनयूँ ख़यालों में शब-ओ-रोज़ का आना तेराहोश वालों को कहीं फिर न बना दे पागलमहफिले हुस्न में बन ठन के यूँ आना तेराभूल पाना बड़ा मुश्किल है वो दिलकश मंज़रमुस्कुरा कर लब-ए-नाज़ुक को दबाना तेरा_________________________ Sep/19तुम्हारी याद के लश्कर उदास बैठे हैंहसीन ख़्वाब के मंज़र उदास बैठे हैंजो मेरी छत पे कबूतर उदास बैठे हैंवो तेरी याद में दिलबर उदास बैठे हैंतमाम गालियाँ हैं ख़ामोश तेरे जाने सेतमाम राह के पत्थर उदास बैठे हैंबिना पिए तो सुना है उदास रिंदों कोमियाँ जी आप तो पी कर उदास बैठे हैंज़रा सी बात पे वो छोड़कर गया मुझकोज़रा सी बात को लेकर उदास बैठे हैंतेरे बग़ैर हर एक शय की आँख पुरनम हैहमी नहीं मह-ओ-अख़्तर उदास बैठे हैंतमाम शहर तरसता है उनसे मिलने को’रज़ा’ जी आप तो मिलकर उदास बैठे हैं_________________________Aug/19बिन तेरे रात गुज़र जाए बड़ी मुश्किल हैऔर फिर याद भी न आए बड़ी मुश्किल हैखोल कर बैठे हैं छत पर वो हसीं ज़ुल्फ़ों कोऐसे में धूप निकल आए बड़ी मुश्किल हैमेरे महबूब का हो ज़िक्र अगर महफ़िल मेंऔर फिर आँख न भर आए बड़ी मुश्किल हैवो हंसीं वक़्त जो मिल करके गुज़ारा था कभीफिर वही लौट के आ जाए बड़ी मुश्किल हैवो सदाक़त वो सख़ावत वो मोहब्बत लेकरफिर कोई आप सा आ जाए बड़ी मुश्किल है____________________________ jun /19चौदवीं शब को सरे बाम वो जब आता हैमाह-ए-कामिल भी उसे देख के शरमाता हैमैं उसे चाँद कहूँ, फूल कहूँ, या शबनमउसका ही चेहरा हर एक शय में नज़र आता हैजब तसव्वुर में तेरा चेहरा बना लेता हूँतब कहीं जाके मेरे दिल को सुकूं आता हैरक़्स करती हैं बहारें भी तेरे आने सेहुस्न मौसम का ज़रा और निखर जाता हैकितने अल्फाज़ मचलते हैं संवरने के लिएजब ख़्यालों में कोई शेर उभर आता हैमैं मनाऊँ तो भला कैसे मनाऊँ उसकोमेरा महबूब तो बच्चो सा मचल जाता हैजब उठा लेती है माँ हाथ दुआओं के लिएरास्ते से मेरे तूफ़ान भी हट जाता है10 _________________________ Aprजनाब-ए-‘मीर’ के लहजे की नाज़ुकी कि तरहतुम्हारे लब हैं गुलाबों की पंखुड़ी की तरहशगुफ्ता चेहरा ये ज़ुल्फ़ें ये नरगिसी आँखेतेरा हसीन तसव्वुर है शायरी की तरहअगर ऐ जाने तमन्ना तू छत पे आ जाएअंधेरी रात भी चमकेगी चांदनी की तरहयूँ ही न बज़्म से तारीकियाँ हुईं ग़ायबकोई न कोई तो आया है रोशनी की तरहयही ख़ुदा से दुआ मांगता हूँ रातो दिनकी मै भी जी लूं ज़माने में आदमी तरहMar_________________________अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शबऔर ख़ुश्बू निचो रही है शबमेरे ख़ाबों की ओढ़कर चादरमेरे बिस्तर पे सो रही है शबअब अंधेरों से जंग की ख़ातिरकुछ चराग़ों को बो रही है शबसुब्ह-ए-नौ के क़रीब आते हीअपना अस्तित्व खो रही है शबदिन के सदमों को सह रहा है दिनरात का बोझ ढो रही है शबJan_________________________हमने तुम्हारे वास्ते क्या क्या नहीं कियाअफ़सोस तुमने हमपे भरोसा नहीं कियाआया है जब से नाम तुम्हारा ज़बान परहोटों ने फिर किसी का भी चर्चा नहीं कियाज़ुल्मों सितम ज़माने के हंस हंस के सह लिएलेकिन कभी ईमान का सौदा नहीं कियाअमन-ओ-अमां से हमने गुज़ारी है ज़िंदगीमज़हब के नाम पर कभी झगड़ा नहीं कियाउम्मीद उस बशर से करें क्या वफ़ा की हमजिसने किसी के साथ भी अच्छा नहीं कियामुझको मिला फ़रेब ‘रज़ा’ इश्क़ में मगरमैंने किसी के साथ भी धोका नहीं कियाDec19_________________________मेहनत की जब खुश्बू टपके परछाईं मुस्काती हैथक कर उनकी बाँहों में तब अंगड़ाई मुस्काती हैउनकी खुश्बू पाकर दिल की अँगनाई मुस्काती हैउनको छूने से यादों की बीनाई मुस्काती हैजिनके खिलने से दुनिया का हर गुलशन आबाद हुआउन कलिओं की ख़ुशी सजाकर शहनाई मुस्काती हैउनकी ख़ुश्बू से खुश्बू है गुलशन के सब फूलों मेंउनको छूकर आने वाली पुरवाई मुस्काती हैयादें घायल सांसें बोझिल जीना है दुश्वार मेरामेरी हालत देख के अब तो तन्हाई मुस्काती हैNov18________________________नूर चेहरे से यूँ छलकता हैजैसे सूरज कोई चमकता हैएक दफ़ा ख़्वाब में वो क्या आयाघर मेरा अब तलक महकता हैअब तलक इन ज़ईफ़ आँखों मेंसिर्फ़ तेरा बदन चमकता हैक्या कशिश है तुम्हारे आंखो मेंदेखकर तुमको दिल धड़कता हैNov18_______________________हम जैसे पागल बहुतेरे फिरते हैंआप भला क्यूँ बाल बिखेरे फिरते हैंकाँधों पर ज़ुल्फ़ें ऐसे बल खाती हैंजैसे लेकर साँप सपेरे फिरते हैंचाँद -सितारे क्यूँ मुझसे पंगा लेकरमेरे पीछे डेरे – डेरे फिरते हैंखुशियां मुझको ढूँढ रही हैं गलियों मेंपर ग़म हैं की घेरे – घेरे फिरते हैंना जाने कब उनके करम की बारिश होऔर न जाने कब दिन मेरे फिरते हैOct18_______________________बहारें कब लबों को खोलती हैंबड़ी हसरत से कलियाँ देखती हैंभले ख़ामोश हैं ये लब तुम्हारेमगर आँखे बहुत कुछ बोलती हैंअमीर-ए-शहर का, क़ब्ज़ा है लेकिनग़रीबों की दीवारें टूटती हैंसमुंदर को कहाँ ख़ुश्की का डर हैवो नदिया हैं जो अक्सर सूखती हैंन जाने कब हटा दें ज़ुल्फ अपनीउन्हें एक टक ये आँखें देखती हैं’रज़ा’ है रब का ये अहसान मुझपरजो खुशियां मेरे घर में खेलती हैंOct18_______________________तमन्ना है संवर जाने से पहलेतुझे देखूँ निखर जाने से पहलेकभी मुझपर भी हो नज़र-ए-इनायतमेरी हस्ती बिखर जाने से पहलेतेरे पहलू में ही निकले मेरा दमयही ख़्वाहिश है मर जाने से पहलेचलो एक प्यार का पौधा लगाएँबहारों के गुज़र जाने से पहलेगुज़रना है मुझे उनकी गली सेवज़ू कर लूँ उधर जाने से पहलेचलो इक दूसरे में डूब जाएंउजालों के उभर जाने से पहलेSip18________________________ख़राबी के नज़ारे उग रहे हैंमुनाफ़े में ख़सारे उग रहे हैंतेरे होटो पे कलियाँ खिल रही हैंमेरे आंखो में तारे उग रहे हैफलक़ चूमे है धरती के लबों कोकि धरती से किनारे उग रहे हैंतुम्हारे इश्क़ में जलने की ख़ातिरबदन में कुछ शरारे उग रहे हैंफ़लक के चाँद को छूने की ज़िद में’रज़ा’ जी पर हमारे उग रहे हैंSip18_________________________ (20)ख़ुश्बू घुली नहीं है पवन में अभी तलकक्या मौसम-ए-ख़िज़ाँ है चमन में अभी तलकमेरे सुनहरे ख़ाब जलाकर हैं खुश बहुतकरते हैं शोले रक़्स कफ़न में अभी तलकइस रोशनी ने हमको चबाया है इस क़दरदाँतों के हैं निशान ज़ेहन में अभी तलकहर धर्म के गुलो से महकता है ये चमनख़ुश्बू बसी है मेरे वतन में अभी तलकअब तो बदन में पहली सी ताक़त नहीं ‘रज़ा’लज़्ज़त मगर वही है सुख़न में अभी तलकJuly18_____________________________जिस तरह से फूलों की डालियाँ महकती हैंमेरे घर के आंगन में बेटियां महकती हैंफूल सा बदन तेरा इस क़दर मुअत्तर हैख़्वाब में भी छू लूं तो उंगलियां महकती हैंमाँ ने जो खिलाई थीं अपने प्यारे हाथो सेज़हन में अभी तक वो रोटियां महकतीउम्र सारी गुज़री हो जिसकी हक़ परस्ती मेंउसकी तो क़यामत तक नेकियाँ महकती हैंहो गईं रज़ा रुख़सत घर से बेटियां लेकिनअब तलक निगाहों में डोलियां महकती हैंJun18______________________________नाज़ो अदा से मुझको लुभाने लगे हैं वोदिल में चराग़े इश्क़ जलाने लगे हैं वोजब तीरगी सी छाने लगी बज़्म-ए-नाज़ मेंज़ुल्फें, रुख़-ए-हसीं से हटाने लगे हैं वोये इश्क़ है जुनूं है शरारत है या मज़ाक़लिख लिख के मेरा नाम मिटाने लगे है वोअब प्यार का यक़ीन सा होने लगा मुझेशरमा के मुझसे नज़रें चुराने लगे हैं वोउंगली पकड़ के चलना सिखाया जिन्हे ‘रज़ा’अब साथ मेरा छोड़ के जाने लगे हैं वो(May18_____________________________ज़िन्दगी का फैसला हो जाएगातू सनम जिस दिन मेरा हो जाएगाप्यार की, कुछ बूँद ही मिल जाए तोगुलशन-ए-दिल फिर हरा हो जाएगादामन-ए-महबूब जिस दम मिल गयाआंसुओं का हक़ अदा हो जाएगाधड़कने किसको पुकारेंगी मेरीतू अगर मुझसे जुदा हो जाएगानाम लेंगे देखकर तुझको मेरातू मेरा जब आईना हो जाएगागर्दिशों की आँच में तपकर ‘रज़ा’एक दिन तू भी खरा हो जाएगाApr18__________________________मेरे महबूब कभी मिलने मिलाने आजामेरी सोई हुई तक़दीर जगाने आजागुलशन-ए-दिल को मोहब्बत से सजाने आजाबन के खुश्बू मेरी साँसों में समाने आजानाम ले ले के तेरा लोग हंसेगें मुझपरमेरी चाहत की सनम लाज बचाने आजाजिस्म बे – जान हुआ जाता है धीरे-धीरेरूह बन कर मेरी धड़कन में समाने आजाइससे पहले की मेरे मौत गले लग जाएअपने वादे को सनम अब तो निभाने आजातेरी हर एक अदा जान से प्यारी है मुझेतू हंसाने न सही मुझको रुलाने आजाएक मुद्दत से ख़िज़ां नाच रही है हर सूगुलशने इश्क़ उजड़ता है बचाने आजाइश्क़ की राह में तन्हा न ‘रज़ा’ हो जाएबन के जुगनू तु मुझे राह दिखाने आजाMar18_____________________________मेरी तरह वो भी हिम्मत दिखलाएं तोखुल्लम खुल्ला मुझ से मिलने आएं तोआँखों को कुछ सुस्ताने की मुहलत दोरस्ता तकते तकते गर थक जाएं तोमन की प्यास रफू चक्कर हो जाएगीआँखों के पनघट पे मिलने आएं तोफिर मैं सजदा करते करते आऊंगाअपने दर पर मुझको कभी बुलाएं तोचाहत पे शबनम की बूंदें मल देनाप्यार की सांसें जिस दम मुरझा जाएं तोख़्वाबों में आग़ाज़ मिलन का कर देंगेमेल जोल पर पहरे लोग बिठायें तोशाम से ही बैठे हैं जाम ‘रज़ा’ लेकरयादें उनकी आ कर हमें सताएं तो_________________________________सलीम रज़ा रीवाMar18___________________________ (25)मेरे महबूब बता तुझको भुलाऊँ कैसेतू मेरी जान है ये जान गवाऊँ कैसेतू कहे तो मैं खुरच डालूँ बदन को लेकिनतेरी खुश्बू मेरी साँसों से मिटाऊँ कैसेतु मुझे याद न कर भूल जा तेरी मर्ज़ीमैं तेरी याद मेरे दिल से भुलाऊँ कैसेतुझसे फुर्सत ही नहीं मिलती मेरी जान मुझेतो ख़यालों में किसी और को लाऊँ कैसेतेरी तस्वीर मेरे दिल में बसी है लेकिनचीर कर दिल को मेरी जान दिखाऊँ कैसेMar18____________________________हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ तो क्या करेंऐसे में उनसे दूर ना जाएँ तो क्या करेंउसकी अना ने सारे तअल्लुक़ मिटा दिएउस बे-वफ़ा को भूल न जाएँ तो क्या करेंमीना भी तू है मय भी तू साक़ी भी जाम भीआँखों में तेरी डूब न जाएँ तो क्या करेंकश्ती को डूबने से बचाया बहुत मगरहो जाएं गर ख़िलाफ़ हवाएँ तो क्या करेंखुशियों का इंतज़ार ‘रज़ा’ मुद्दतों से हैपीछा अगर न छोड़ें बलाएँ तो क्या करेंFeb18 ____________________________आख़िर ये इश्क़ क्या है जादू है या नशा हैजिसको भी हो गया है पागल बना दिया हैहाथो में तेरे हमदम जादू नहीं तो क्या हैमिट्टी को तू ने छूकर सोना बना दिया हैउस दिन से जाने कितनी नज़रें लगी हैं मुझपरजिस दिन से तूने मुझको अपना बना लिया हैखिलता हुआ ये चेहरा यूँ ही रहे सलामततू ख़ुश रहे हमेशा मेरी यही दुआ हैइक पल में मुस्कुराना इक पल में रूठ जानातेरी इसी अदा ने दीवाना कर दिया है____________________________FEB 18जब भी क़समें हमारी खाते हैंसच यक़ीनन कोई छुपाते हैंछोड़ जाएंगे हम तुझे तन्हारोज़ कहकर यही डराते हैंजब तू होता है आँख से ओझलकैसे- कैसे ख़याल आते हैंहाल उनका किसी ने पूछा क्याचोट खाकर जो मुस्कुराते हैमुझसे नाराज़ हैं ‘रज़ा’ फिर भीमेरी ग़ज़लों को गुनगुनाते है____________________________FEB 18ज़िंदगी को गुनगुना कर चल दिएमौत को अपना बना कर चल दिएउम्र भर की दोस्ती जाती रहीआप ये क्या गुल खिलाकर चल दिएअब यकीं उनकी ज़बाँ का क्या करेंजो फ़क़त सपने दिखाकर चल दिएआज उनका दिल दुखा शायद बहुतबज़्म से आँसू बहा कर चल दिएबे-बसी में और क्या करते ‘रज़ा’दर्द-ओ-ग़म अपना सुनाकर चल दिएFab18____________________________ (30)धूप का विस्तार लगाकर सो गएछांव सिरहाने दबाकर सो गएज़िंदगी से थक-थका कर सो गएवो चराग़-ए-जाँ बुझा कर सो गएगुफ़्तगू की दिल मे ख़्वाहिश थी मगरवो मेरे ख़्वाबों में आकर सो गएतंग थी चादर तो हमने यूँ कियापांव सीने से लगाकर सो गएउनकी नींदों पर निछावर मेरे ख़ाबजो ज़माने को जगाकर सो गएबे-कसी में और क्या करते ‘रज़ा’ख़ुद को ही समझा-बुझा कर सो गएJan18____________________________हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दियादुश्वारियों को पांव के नीचे दबा दियामेरी तमाम उँगलियाँ घायल तो हो गईंलेकिन तुम्हारी याद का नक़्शा मिटा दियामैंने तमाम छाँव ग़रीबों में बांट दीऔर ये किया कि धूप को पागल बना दियाउसके हँसीं लिबास पे इक दाग़ क्या लगासारा ग़ुरूर ख़ाक़ में उसका मिला दियाजो ज़ख्म खाके भी रहा है आपका सदाउस दिल पे फिर से आपने खंज़र चला दियाउसने निभाई ख़ूब मेरी दोस्ती ‘रज़ा’इल्ज़ाम-ए-क़त्ल-ए-यार मुझी पर लगा दियाJan18____________________________जगमगाती ये जबीं आरिज़-ए-गुलफा़म रहेतू जवानी का छलकता हुआ इक जाम रहेगुल-ब-दामाँ तेरी हर सुब्ह रहे शाम रहेहर तरफ़ सहन-ए-गुलीस्तां में तेरा नाम रहेसारी दुनिया में तेरे इल्म की ख़ुश्बू महकेजब तलक चाँद सितारें हों तेरा नाम रहेइस तरह तेरे तसव्वुर में मगन हो जाऊँमुझको अपनों से न ग़ैरों से कोई काम रहेजब तेरी दीद को हम शहर में तेरे पहुंचेंअपने दामन से न लिपटा कोई इल्ज़ाम रहेतेरी ख़ुशहाली की हरपल ये दुआ करते हैंतेरे दामन में ख़ुशी सुब्ह रहे शाम रहेहर क़दम मेरा उठे तेरी ‘रज़ा’ की ख़ातिरमेरे होंटो पे हमेशा तेरा पैगाम रहेJan18____________________________जब से तूने दिल को तोड़ा दिल का लगाना छोड़ दियातेरी गलियों में भी अब तो आना जाना छोड़ दियातेरी ख़ुशिओं की ख़ातिर सब खुशिओं को क़ुर्बान कियातेरे प्यार की ख़ातिर मैंने सारा ज़माना छोड़ दियातुझसे मेरा इश्क़ जुनूं है तू ही दिल की धड़कन हैतुझको पाकर दुनिया का सब मालो खज़ाना छोड़ दिया____________________________दर- दर फिरते लोगों को दर दे मौलाबंजारों को भी अपना घर दे मौलाजो औरों की खुशियों में खुश होते हैंउनका भी घर खुशियों से भर दे मौलाज़ुल्मो सितम हो ख़त्म न हो दहशतगर्दीअम्न-ओ-अमाँ यूं बारिश कर दे मौलाभूके प्यासे मुफ़लिस और यतीम हैं जोनज़रे नायत उन पर भी कर दे मौलाजो करते हैं खून ख़राबा जुल्मो सितमउन के भी दिल में थोडा डर दे मौला____________________________हर एक शय से ज़ियादा वो प्यार करता हैतमाम खुशियाँ वो मुझपे निसार करता हैमैं दिन को रात कहूँ वो भी दिन को रात कहेयूँ आँख मूंद कर वो ऐतबार करता हैमै जिसके प्यार को अब तक समझ नही पायातमाम रात मेरा इंतज़ार करता हैहमें तो प्यार है गुल से चमन से खुश्बू सेवो कैसा शख्स है फूलों पे वार करता हैमुझे ख़ामोश निगाहों से देखना उनकाअभी भी दिल को मेरे बेक़रार करता हैउसे ही ख़ुल्द की नेमत नसीब होगी ‘रज़ा’ख़ुदा का ज़िक्र जो लैलो-नहार करता है_________________________रुख़सार जहाँ में कोई ऐसा नही होगाउनसे भी हसीं चाँद का चेहरा नही होगातुम चाँद सितारों की चमक में रहे उलझेतुमने मेरे महबूब को देखा नही होगाहै कौन भला सर पे बलाएं जो ले तेरीकोई भी तो मां-बाप के जैसा नही होगाजो मेरे दिलो जान को करता है मुअत्तरगुलशन में कोई फूल भी ऐसा नही होगाअल्लाह के महबूब पे है ख़त्म नबूबतअब कोई नबी दुनिया में पैदा नहीं होगादिल खोल के करता है मुहब्बत जो किसी सेदुनिया मे ‘रज़ा’ वो कभी रुसवा नही होगा_________________________ये दुनिया ख़ूबसूरत है ज़माना ख़ूबसूरत हैमुहब्बत की नज़र से देखने की बस जरुरत हैवो मेरे बिन तड़पते हैं मैं उनके बिन तड़पता हूँयही तो उनकी चाहत है यही मेरी मुहब्बत हैवो मालिक है ज़माने का, वो जो अता देउसी के हाथ इज़्ज़त है उसी के हाथ शोहरत हैमोहब्बत से ही दुनिया का हर एक दस्तूर ज़िंदा हैहर एक रिश्ता हर एक नाता मोहब्बत की बदौलत हैसभी को प्यार से मिलने की आदत है ‘रज़ा’ हमकोयही इंसानियत है और यह अनमोल दौलत है_________________________रिश्ते वफ़ा के सब से निभाकर तो देखिएसारे जहाँ को अपना बनाकर तो देखिएइसका मिलेगे अज्र खुदा से बहुत बड़ाभूखे को एक रोटी खिलाकर तो देखिएखिल जाएगा खुशी से वो चेहरा गुलाब सारोते हुए को आप हंसा कर तो देखिएखुश्बू से महक जाएगा घर बार आपकाउजड़े हुए चमन को बसाकर तो देखिएहोगा तुम्हारा नाम शहीदों में भी शुमारसरहद पे अपनी जान लुटा कर तो देखिएइक चौंदवी का चाँद नज़र आएगा ‘रज़ा’जुल्फे रुख़-ए-हँसी से हटाकर तो देखिए____________________________________यूँ मजहबों में बंट के ना संसार बांटियेकुछ बांटना है आपको तो प्यार बांटियेनदियाँ बहे न ख़ून कि आंगन मे फिर कभीअपने ही घर मे तीर ना तलवार बाँटियेरहने भी दीजे ग़ुंचा-ओ-गुल को इसी तरहगुलशन हरा भरा है ना श्रंगार बाँटियेहर धर्म के गुलो से महकता है ये चमनखंजर चला के अपने गुलज़ार बाँटियेजब भी मिलें किसी से ‘रज़ा’ प्यार से मिलेंछोटी सी ज़िन्दगी में ना तक़रार बाँटिये_______________________________ (40)जाने कैसे होंगे आंसू बहते हैं तो बहने दोभूली बिसरी बात पुरानी कहते हैं तो कहने दोहम बंजारों को ना कोई बाँध सका ज़ंजीरों मेंआज यहां कल वहां भटकते रहते हैं तो रहने दोमुफ़लिस की तो मजबूरी है सर्दी गर्मी बारिश क्यारोटी के ख़ातिर सारे ग़म सहते हैं तो सहने दोअपने सुख संग मेरे दुख को साथ कहां ले जाओगेअलग अलग वो इक दूजे से रहते हैं तो रहने दोमस्त मगन हम अपनी धुन में रहते हैं दीवानो साजाने कितने हमको पागल कहते हैं तो कहने दोप्यार में उनके सुध-बुध खोकर ऐसे ‘रज़ा’ बेहाल हुएलोग हमे आशिक़ आवारा कहते हैं तो कहने दो_________________________सुब्ह रंगी शब सुहानी हो गईजब से तेरी मेहरबानी हो गईतूने देखा प्यार से बस इक नज़रदिल पे तेरी हुक्मरानी हो गईरूठना हँसना मनाना प्यार मेंज़िंदगी कितनी सुहानी हो गईउस ने माँगी ज़िंदगी सौग़ात मेंनाम उस के ज़िंदगानी हो गईमैं भी हूँ उसकी दिवानी इस तरहजिस तरह ‘मीरा’ दिवानी हो गई____________________जब से उन की मेहरबानी हो गईख़ूबसूरत ज़िंदगानी हो गईखो गए मसरूफ़ियत की भीड़ मेंख़त्म इस में ज़िंदगानी हो गईइब्तिदा-ए-ज़िंदगी की सुब्ह सेशाम तक पूरी कहानी हो गईजिसकी सुन्दरता पे सबको नाज़ थावो इमारत अब पुरानी हो गईमेरे मौला लाज रख लेना मेरीमेरी बिटिया अब सियानी हो गईना-ख़ुदा जब ज़िंदगी का वो ‘रज़ा’पार अपनी ज़िंदगानी हो गई_________________________नाज़-ओ-अदा के साथ कभी बे-रुख़ी के साथदिल में उतर गया वो बड़ी सादगी के साथआएगा मुश्क़िलों में भी जीने का फ़न तुझेकूछ दिन गुज़ार ले तू मेरी मुफ़लिसी के साथख़ून-ए- जिगर निचोड़ के रखते हैं शेर मेंयूँ ही नहीं है प्यार मुझे शायरी के साथअच्छी तरह से आपने जाना नहीं जिसेयारी कभी न कीजिये उस अजनबी के साथमुश्किल में कैसे जीते हैं यह उनसे पूछियेगुज़रा है जिनका वक़्त सदा मुफ़लिसी के साथउस पर न ऐतबार कभी कीजिए ‘रज़ा’धोका किया है जिसने हमेशा सभी के साथ_________________________हँस दे तो खिले कलियाँ गुलशन में बहार आएवो ज़ुल्फ़ जो लहराएँ मौसम में निखार आएमिल जाए कोई साथी हर ग़म को सुना डालेंबेचैन मिरा दिल है पल भर को क़रार आएमदहोश हुआ दिल क्यूँ बेचैन है क्यूँ आँखेंहूँ दूर मय-ख़ाने से फिर क्यूँ ऐ ख़ुमार आएखिल जाएँगी ये कलियाँ महबूब के आमद सेजिस राह से वो गुज़रे गुलशन में बहार आएजिन-जिन पे इनायत है जिन-जिन से मोहब्बत हैउन चाहने वालो में मेरा भी शुमार आएफूलों को सजाया है पलकों को बिछाया हैऐ बाद-ए-सबा कह दे अब जाने बहार आएबुलबुल में चहक तुम से फूलों में महक तुम सेरुख़्सार पे कलियों के तुम से ही निखार आए___________________________________ये मत कहना कोई कमतर होता हैदुनिया में इन्सान बराबर होता हैटूटा-फूटा गिरा-पड़ा कुछ तंग सहीअपना घर तो अपना ही घर होता हैताल में पंछी पनघट गागर चौपालेंकितना सुन्दर गाँव का मंज़र होता हैकाम नहीं है तीरों का तलवारों काप्यार तो गोली बम से बेहतर होता हैजो तारीकी में भी रस्ता दिखलाएवो ही हमदम वो ही रहबर होता है_________________________मेरा मज़हब यही सिखाता हैसारी दुनिया से मेरा नाता हैज़िन्दगी कम है बाँट ले खुशियाँदिल किसी का तू क्यूँ दुखाता हैहर भटकते हुए मुसाफ़िर कोसीधा रस्ता वही दिखाता हैदुश्मनों के तमाम चालों सेमेरा रहबर मुझे बचाता हैदोस्त वो है जो मुश्किलों में भीअपने यारों के काम आता है________________________जो बनकर के जीता है इंसान सदाउसके लब पे रहती है मुस्कान सदाहक़ पे चलने वाले हक़ पे चलते हैंमाना की बहकाता है शैतान सदाधीरे – धीरे शेर मेरे भी चमके गेंपढ़ता हूँ मै ग़ालिब का दीवान सदारिज़्क मे उसके बरकत हरदम होती हैजिसके घर में आते हैं मेहमान सदाभेद भाव से दूर ‘रज़ा’जो रहता हैमहफ़िल में वो पाता है सम्मान सदा_________________________मुश्क़िलों में दिल के भी रिश्ते पुराने हो गएग़ैर से क्या हो गिला अपने बेगाने हो गएचंद दिन के फ़ासले के बाद हम जब भी मिलेयूँ लगा जैसे मिले हम को ज़माने हो गएपतझड़ों के साथ मेरे दिन गुज़रते थे कभीआप के आने से मेरे दिन सुहाने हो गएमुस्कराहट उनकी कैसे भूल पाउँगा कभीइक नज़र देखा जिन्हें औ हम दिवाने हो गएआँख में शर्म-ओ-हया,पाबंदियाँ, रुस्वाईयांउनके ना आने के ये अच्छे बहाने हो गएआज भी उनकी अदाओं में वही है शोखियाँआज फिर उनकी गली में आने जाने हो गएअब भी है रग रग में क़ायम प्यार की ख़ुश्बू ‘रज़ा’क्या हुआ जो ज़िस्म के कपड़े पुराने हो गए_________________________रंज-ओ-ग़म ज़िंदगी के भुलाते रहोगीत ख़ुशिओं के हर वक़्त गाते रहोमोतियों की तरह जगमगाते रहोबुल बुलों की तरह चहचहाते रहोजब तलक आसमां में सितारें रहेंज़िंदगी भर यूँ ही मुस्कुराते रहोइतनी खुशियां मिले ज़िंदगी में तुम्हेदोनों हांथों से उनको लुटाते रहोहम भी तो आपके जां निसारों में हैंक़िस्सा- ए- दिल हमें भी सुनाते रहोख़ुद ब ख़ुद ही फ़ज़ाएँ महक जाएंगीअपनी ज़ुल्फ़ें हवा में उड़ाते रहोरात यूँ ही न कट पाएगी जाग करकुछ तो मेरी सुनो कुछ सुनाते रहो_________________________________सलीम रज़ा रीवा___________________________________ (50)हम दर-बदर की ठोकरे खाते चले गएफिर भी तराने प्यार के गाते चले गएकोशिश तो की भंवर ने डुबोने की बारहाहम कश्ती-ए-हयात बचाते चले गएअपना कहा किसी ने गले से लगा लियायूँ दुश्मनों को दोस्त बनाते चले गएरुसवाईयों के डर से कभी बज़्में नाज़ मेंहंस-हंस के दर्द-ए-दिल को छुपाते चले गएकरता है जो सभी के मुक़द्दर का फ़ैसलाउसकी ‘रज़ा’ की शम्अ जलाते चले गए___________________________________हार कर रुकना नहीं मंज़िल भले ही दूर हैठोकरें खाकर सम्हलना वक़्त का दस्तूर हैहौसले के सामने तक़दीर भी झुक जायेगीतू बदल सकता है क़िस्मत किसलिए मजबूर हैआदमी की चाह हो तो खिलते है पत्थर में फूलकौन सी मंज़िल भला इस आदमी से दूर हैख़ाक का है पुतला इंसाँ ख़ाक में मिल जाएगाकैसी दौलत कैसी शुहरत क्यों भला मग़रूर हैवक़्त से पहले किसीको कुछ नहीं मिलता कभीवक़्त के हाथो यहाँ हर एक शय मजबूर है___________________________________मेरे वतन में आते हैं सारे जहाँ से लोगरहते हैं इस ज़मीन पे अम्न-ओ-अमाँ से लोगलगता है कुछ खुलुस-ओ-महब्बत मे है कमीक्यूं उठ के जा रहे हैं बता दरमियाँ से लोगमेरा ख़ुलूस मेरी महब्बत को देखकरजुड्ते गये हैं आके मेरे कारवाँ से लोगकैसा ये कह्र कैसी तबाही है ऐ खुदाबिछ्डे हुए हैं अपनो से अपने मकाँ से लोगहिन्दी अगर है जिस्म तो उर्दू है उसकी जानकरते हैं प्यार आज भी दोनों ज़बाँ से लोगनज़्र-ए-फ़साद होता रहा घर मेरा ‘रज़ा’निकले नहीं मुहल्ले के अपने मकां से लोग_________________________हम तो उनके प्यार का दीपक दिल में जलाए बैठे हैंजाने क्यों वो हमको अपने दिल से भुलाए बैठे हैंहैरत है जो प्यार मुहब्बत से ना वाकिफ़ हैं यारोवह इल्ज़ाम दग़ाबाज़ी का मुझ पे लगाए बैठे हैंकौन है अपना कौन पराया कैसे पहचाने कोईचेहरों पर तो फ़र्ज़ी चेहरे लोग सजाए बैठे हैंपरदेसी और बेगानों की बात करें आख़िर कैसेहम तो अपनों से ही कितने धोके खाए बैठे हैंवो बेगाने हो जाएंगे ऐसी ‘रज़ा’उम्मीद न थीहम तो उनकी आज भी यादें दिल से लगाए बैठे हैं_________________________दिलबर तुम कब आओगे हम आस लगाए बैठे हैंइन आँखो को जाने कब से हम समझाए बैठे हैकिसको ख़बर थी भूलेंगे वो बचपन की सब यादों कोउनकी चाहत आज तलक हम दिल में बसाए बैठे हैंदिल की बात जुबां तक आए ये नामुमकिन लगता हैख़ामोशी में जाने कितने राज़ छुपाए बैठे हैंवोभी बदल जाएँगे इक दिन ऐसी मुझे उम्मीद न थीप्यार में जिनके हम अपना घरबार लुटाए बैठे हैंकिसको दिल का दर्द दिखाएं किसको हाल सुनाएं हमअपनी मज़बूरी का ‘रज़ा’ ख़ुद बोझ उठाये बैठे_________________________कोई रूठा है अगर उसको मनाना होगाभूल कर शिकवे-गिले दिल से लगाना होगाजिन चराग़ों से ज़माने में उजाला फैलेउन चराग़ों को हवाओ से बचाना होगाजिसकी ख़ुशबू से महक जाए ये दुनिया सारीफूल गुलशन में कोई ऐसा खिलाना होगामैं जहाँ छोड़ के आ जाऊंगा तेरी ख़ातिरशर्त ये है कि मेरा साथ निभाना होगादिल के रिश्तों को अगर प्यार से जोड़ा जाएएक बंधन में बँधा सारा ज़माना होगाचाहते हो कि मिटे सब के दिलों से नफ़रतदुश्मनों को भी ‘रज़ा’ दोस्त बनाना होगा_________________________________बातों ही बातों में उनसे प्यार हुआये मत पूछो कैसे कब इक़रार हुआवो शरमाएँ जैसे शरमाएँ कलियाँरफ्ता रफ्ता चाहत का इज़हार हुआदिल की बातें वो ऐसे पढ़ लेता हैदिल न हुआ जैसे कोई अख़बार हुआउनसे ही खुशियाँ है मेरे आंगन मेंउनसे ही रौशन मेरा संसार हुआजब से आँखें उनसे मेरी चार हुईंतब से ‘रज़ा’ मेरा जीना दुश्वार हुआ______________________गुलशन में जैसे फूल नहीं ताज़गी नहींतेरे बग़ैर ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी नहींये और बात है कि वो मिलते नहीं मगरकिसने कहा कि उनसे मेरी दोस्ती नहींतेरे ही दम से खुशियां है घर बार में मेरेहोता जो तू नहीं तो ये होती ख़ुशी नहींख़ून-ए-जिगर से मैंने सवाँरी है हर ग़ज़लमेरे, सुख़न का रंग कोई काग़ज़ी नहींमैं खुद गुनाहगार हूँ अपनी निगाह मेंउसके ख़ुलूस-ओ-इश्क़ में कोई कमी नहींछूके दरिचा लौट गया मौसम-ए- बहार.लगता है अब नसीब मे मेरे खुशी नहीं.तुझसे ‘रज़ा’ के शेरों में संदल सी है महकमुमकिन तेरे बग़ैर मेरी शायरी नहीं_________________________नश्शा नहीं सुरूर नहीं बे-ख़ुदी नहींउसके बग़ैर ज़िन्दगी ये ज़िन्दगी नहींवो क्या गया की रौनके महफ़िल चली गयीजल तो रही है शम्अ मगर रोशनी नहींचैन-ओ -सुकूंन भी गया होशो हवास भीकैसे कहें कि उनकी ये जादूगरी नहींराहे वफ़ा में ठोकरें खा कर पता चलामुझ में कमी है यार में कोई कमी नहींमाँ बाप के ही दम से सभी का वजूद हैउनसे जहां में कोई भी शय क़ीमती नहीं__________________________ज़िंदगी का सहारा मिले ना मिलेसाथ मुझको तुम्हारा मिले ना मिलेआजा तुझको गले से लगा लू सनमइतनी फ़ुरसत दुबारा मिले ना मिलेनीद में ख़्वाब में दिन में औ रात मेंतू मिले कुछ भी यारा मिले ना मिलेमाँ की शफ़क़त जहाँ में बड़ी चीज़ हैये मोहब्बत की धारा मिले न मिलेजी ले खुशिओं की पतवार है हाँथ मेंबहरे ग़म में किनारा मिले न मिले_______________________ (60)हमसफ़र तुम सा प्यारा मिले न मिलेसाथ मुझको तुम्हारा मिले न मिलेइश्क़ का कर दे इज़हार तन्हा है वोऐसा मौक़ा दोबारा मिले न मिलेसाँस बनकर रहो धड़कनों में मेरीमुझको जन्नत ख़ुदारा मिले न मिलेवो भी होते तो आता मज़ा और भीफिर सुहाना नज़ारा मिले न मिलेक्या बताये हुई क्या है मुझसे ख़तासुनके नज़रे दुबारा मिले ना मिले_________________________छोड़कर दर तेरा हम किधर जाएँगेबिन तेरे आह भर-भर के मर जाएँगेतेरी आमद की जिस दम सुनेगें ख़बरराह में फूल बन कर बिखर जाएँगेतूने छोड़ा अगर साथ मेरा कभीहिज्र मे तेरे घुट-घुट के मर जाएँगेआपको देखकर चाँद शरमाएगामेरी जां आप जिस दम संवर जाएँगेबन संवर के अगर आप आ जाएं तोबज़्म में सब के चेहरे उतर जाएँगेइश्क़ मुश्किल बहुत है मगर ऐ ‘रज़ा’इश्क़ में फिर भी हद से गुज़र जाएँगे_________________________चाँद जैसे मुखड़े पर तिल जो काला काला हैमेरे घर के आँगन में सुरमई उजाला हैवज़्म ये सजी कैसी कैसा ये उजाला हैमहकी सी फ़ज़ाएँ हैँ कौन आने वाला हैमुफ़लिसी से रिश्ता है ग़म से दोस्ती अपनीमुश्किलों को भी हमने दिल में अपने पाला हैउसकी शोख़ नज़रों का ये कमाल है देखोज़िंदगी में अब मेरी हर तरफ उजाला हैइतनी सी गुज़ारिश है नींद अब तो जल्दी आआज ख़ाब में मेरा यार आने वाला हैभूल वो गया मुझको ग़म नहीं ‘रज़ा’ लेकिनहमने उसकी यादों को अब तलक सँभाला है_________________________तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैंजाँ निसार करते थे जाँ निसार करते हैंख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक होबस यही दुआ रब से बार-बार करते हैंउँगलियाँ उठाते हैं लोग दोस्तों पर भीहम तो दुश्मनों पर भी ऐतबार करते हैंहम तो जान दे देते उनके इक इशारे परदोस्तों में वो हमको कब शुमार करते हैंफूल सा खिला चेहरा आँख वो ग़ज़ालों सीमुझको ख़्वाब में अक्सर बेक़रार करते हैं_________________________इश्क़ तुमसे किया नहीं होताज़िन्दगी में मज़ा नहीं होताज़िन्दगी तो संवर गयी होतीतू जो मुझसे जुदा नहीं होतातेरी चाहत ने कर दिया पागलप्यार इतना किया नहीं होताचोट खाएँ भी मुस्कुराएँ भीअब तो ये हौसला नहीं होतासबको दुनिया बुरा बनाती हैकोई इंसाँ बुरा नही होता_________________________दूर जितना ही मुझसे जाएंगेमुझको उतना क़रीब पाएँगेफिर से खुशिओं के अब्र छाएंगेडूबते तारे झिल मिलाएंगेकुछ न होगा तो आंख नम होगींदोस्त बिछड़े जो याद आएंगेमाना पतझड में हम हुए वीरांअब के सावन में लहलहाएँगेइक ग़ज़ल तेरे नाम की लिखकरसुबह ता शाम गुनगुनाएँगे_________________________मुझसे ऐ जान-ए-जानाँ क्या हो गई ख़ता हैजो यक ब यक ही मुझसे तू हो गया ख़फ़ा हैटूटी हुई हैं शाख़ें मुरझा गई हैं कलियाँतेरे बग़ैर दिल का गुलशन उजड़ गया हैआंखें हैं सुर्ख़ रुख़ पर ज़ुल्फें बिखर रही हैंहिज्रे सनम में शब भर क्या जागता रहा हैतुमने तमाम खुशियाँ औरों के नाम कर दींतेरी इसी अदा ने दीवाना कर दिया हैफाँसी की सज़ा देकर ख़्वाहिश वो पूछते हैंअब क्या उन्हें बताएं क्या आख़िरी ‘रज़ा’ है__________________________शाम-ए-रंगीं गुलबदन गुलफा़म हैमिल गए तुम जाम का क्या काम हैजिससे रोशन मेरी सुब्ह-ओ-शाम हैमेरे होटों पे फक़त वो नाम हैमेरा घर खुशिओं से है आरास्तामेरे रब का ये बड़ा इनआ’म हैधूप में साया हो जैसे छाँव काकाकुल-ए-जानाँ में यूँ आराम हैपा के सुर्खी़ आपके रुख़सार कीख़ूबसूरत आज कितनी शाम हैजिसके दम पर है मोहब्बत का वजूदवो हमारा मज़हब-ए-इस्लाम हैहम किसी से दुश्मनी करते नहींदोस्ती तो प्यार का पैग़ाम हैलोग कहते हैं बुरा कहते रहेंसाफ़ गोई में ‘रज़ा’ बदनाम है_________________________फ़क़त तेरे नज़दीक आने से पहलेबहोत ग़म सहे मुस्कुराने से पहलबहारों का इक शामियाना बना दोख़िज़ाओं के गुलशन में आने से पहलेज़माने को तुमने दिया क्या है सोचोज़माने पे उंगली उठाने से पहलेग़रीबों की आहों से कैसे बचोगेज़रा सोचना दिल दुखाने से पहलेवो मेरी मुहब्बत से रौशन हुआ हैफ़ज़ाओ में यूँ जगमगाने से पहलेकभी चल के शोलों पे भी देखिएगा’रज़ा’ दिल की बस्ती जलाने से पहलेNov18_________________________मुश्किलें भरमार होती जा रही हैं आज कलकोशिशे बेकार होती जा रही हैं आज कलवो अदा-ए-दिल नशीं, क़ातिल नज़र हुस्न ओ हुनरक़ाबिल-ए-इज़हार होती जा रही हैं आज कलचाहिए इनको हमेशा इक दवाई की ख़ुराकख़्वाहिशें बीमार होती जा रही हैं आज कलदौलत-ओ-शोहरत का लालच बढ़ गया है इस क़दरज़िंदगी आज़ार होती जा रही हैं आज कलऐ ‘रज़ा’ कुछ लड़कियाँ जो घर की ज़ीनत थीं कभीरौनक़-ए-बाज़ार होती जा रही हैं आज कल(70)_________________________ Sip18हरेक ज़ुल्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैंजिन्हे है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा वो ख़ुदा से डरते हैंन मुश्किलों से न जौर-ओ-जफ़ा से डरते हैग़म-ए-हयात की काली घटा से डरते हैंकिसी ग़रीब की मुझको न आह लग जाएइसीलिए तो हर एक बद्दुआ से डरते हैंबड़ा सुकून है चैन-ओ-क़रार है दिल कोबदलते दौर की आब-ओ-हवा से डरते हैंजिन्हे ख़बर ही नहीं इश्क़ भी इबादत हैवही तो प्यार- मुहब्बत वफ़ा से डरते हैंये छीन लेती है सब्र-ओ-क़रार का आलम.किसी हसीन की काफ़िर-अदा से डरते हैंख़ता-मुआ’फ़ तो होती है जानते हैं ‘रज़ा’किसी गुनाह कि हम इंतिहा से डरते है_________________________बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भीफ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भीअकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिबकरम फ़रमाँ है मुझ पर कुछ मिजाज़-ए-आशिक़ाना भीजहाँ से कर गए हिजरत मोहब्बत के सभी जुगनूवहां पे छोड़ देती हैं ये खुशियाँ आना जाना भीबहुत अर्से से देखा ही नहीं है रक़्स चिड़ियों काकहीं पेड़ों पे भी मिलता नहीं वो आशियाना भीहमारे शेर महकेंगे किसी दिन उसकी रहमत सेहमारे साथ महकेगा अदब का ये घराना भीन जाने किन ख़्यालों में नहाकर मुस्कुराती है’रज़ा’ उसको नहीं आता है राज़-ए-दिल छुपाना भी_________________________ Apr-19जहां में तेरी मिसालों से रौशनी फैलेकि जैसे चाँद सितारों से रौशनी फैलेतुम्हारे इल्म की खुश्बू से ये जहाँ महकेतुम्हारे रुख़ के चराग़ों से रौशनी फैलेक़दम क़दम पे उजालों का शामियाना होक़दम क़दम पे बहारों से रोशनी फैलेतुम्हारे नाम की शोहरत हो सारी दुनिया मेंतुम्हारे इल्म के धारों से रौशनी फैलेतेरे हवाले से लिक्खी है जो ग़ज़ल मैंनेग़ज़ल वो महके किताबों से रोशनी फैले_________________________ Oct-19हुस्न-ए-जाना लब की लाली रंग धानी फिर कहाँवो नहीं तो ग़ुंचा-ओ-गुल रात रानी फिर कहाँदोस्तों संग खेलना छुपना दरख़्तों के तलेवो सुहाना पल कहाँ यादें सुहानी फिर कहाँथप-थपाकर गुन-गुनाकर मुझको बहलाती सदाखो गईं वो लोरिया अब वो कहानी फिर कहाँपेंड बरगद का घना जो छाँव देता था सदागांव में मिट्टी का घर छप्पर वो छानी फिर कहाँखो गया बचपन जवानी औ बुढ़ापा आ गयाफिर न लौटेगा वो बचपन वो जवानी फिर कहा_________________________राह पर सदाक़त की गर चला नहीं होतासच हमेशा कहने का हौसला नहीं होताकोशिशों से देता है रास्ता समंदर भीहौसला रहे क़यिम फिर तो क्या नहीं होतारौनक़ें नही जातीं मेरे घर के आँगन सेदिल अगर नहीं बंटता, घर बंटा नहीं होताथोड़े ग़म ख़ुशी थोड़ी,थोड़ी सिसकियाँ भी हैज़िन्दगी से अब हमको कुछ गिला नहीं होताडूबती नहीं कश्ती पास आके साहिल केबे वफ़ा अगर मेरा नाख़ुदा नहीं होताउसकी शोख़ नज़रों ने ज़िन्दगी बदल डालीवो अगर नहीं होता कुछ ‘रज़ा’ नहीं होता_________________________________सलीम रज़ा रीवा(75)_________________________जिसे मुश्किल में जीने का हुनर पर्फेक्ट होता हैमसाइब के अंधेरों से वही रिफ्लेक्ट होता हैवही क़ानून को हाथो की कठपुतली समझते हैंकनेक्शन जिनका ऊंचे लोंगों से डारेक्ट होता हैन हो जिससे कभी ग़लती कोई इंसा नहीं ऐसाकहाँ दुनिया में कोई आदमी पर्फेक्ट होता हैमोहब्बत के बिना इस जिंदगानी का मज़ा क्या हैमोहब्बत तो ज़माने का अहम सब्जेक्ट होता हैहमेशा प्यार से जीने की आदत है ‘रज़ा’ जिसकोज़माने भर में ऐसे शख्स का रिस्पेक्ट होता है_________________________ Sep182जिधर देखो उधर मिहनत कशों की ऐसी हालत हैग़रीबों की जमाअत पर अमीरों की हुक़ूमत हैग़रीबों के घरों में रहबरों देखो कभी जा करवहां ख़ुशियां नहीं हैं सिर्फ़ फ़ाक़ा और ग़ुरबत हैकहीं अस्मत फरोशी है कहीं नफ़रत कहीं दहशतज़माने में जिधर देखो क़यामत ही क़यामत हैकभी कलियों का मुस्काना कभी फूलों का मुरझानाये क़ुदरत के तकाज़े हैं यही गुलशन की क़िस्मत है’रज़ा’ साहिब चलो ग़ोताजनि कि मश्क़ करते हैंसमुन्दर के ख़ज़ाने में बड़ी अनमोल दौलत है_________________________रंगीन-ए-जमाल में डूबी हुई मिलेयानी मेरे सुख़न को नई रोशनी मिलेवो चांदनी जो आबरू है आसमान कीऐसा न हो ज़मीन पे घायल पड़ी मिलेकल की मुझे उमीद नहीं है मेरे ख़ुदामेरे नसीब में है जो मुझको अभी मिलेये है दुआ तुम्हारा मुकद्दर बुलंद होतुमको तमाम उम्र ख़ुशी ही ख़ुशी मिलेमिलता रहा ख़ुलूस-ओ-महब्बत से जो ‘रज़ा’मिलता है आज,जैसे कोई अजनबी मिलेSep18_________________________जिसे हम प्यार करते हैं उसे रुसवा नहीं करतेहमारे दरमियाँ क्या है कभी चर्चा नहीं करतेतुम्हारे प्यार की खुश्बू हमेशा साथ रहती हैतुम्हारी याद के लश्कर कभी तन्हा नहीं करतेउजाले बांटते फिरते हैं जो दुनिया में लोगों कोकिसी सूरत में वो ईमान का सौदा नहीं करते’रज़ा’ सी सीने में जिनके नूर-ऐ-ईमाँ जगमगता हैकिसी मजबूर पर ज़ुल्मों सितम ढाया नहीं करतेAug18 _________________________कहीं पर चीख़ होगींऔर कहीं किलकारियाँ होंगींअगर हाकिम के आगे भूक और लाचारियाँ होंगींअगर हर दिल में चाहत हो शराफ़त हो सदाक़त होमहब्बत का चमन होगा ख़ुशी की क्यारियाँ होंगींकिसी को शौक़ यूँ होता नहीं ग़ुरबत में जीने कायक़ीनन सामने उसके बड़ी दुश्वारियाँ होंगींये होली ईद कहती है भला कब अपने हांथों मेंवफ़ा का रंग होगा प्यार की पिचकारियाँ होंगीसुख़नवर का ये आंगन है यहाँ शेरों की ख़ुश्बू हैग़ज़ल और गीत नज़्मों की यहाँ फुलवारियाँ होंगींअगर जुगनू मुक़ाबिल में है आया आज सूरज केयक़ीनन पास उसके भी बड़ी तैयारियाँ होंगींन छोड़ो ये समझ के आग अब ठंडी हुई होगीये मुमकिन है ‘रज़ा’ कुछ राख में चिंगारियाँ होंगीं_________________________अपने हसीन रुख़ से हटा कर नक़ाब कोशर्मिन्दा कर रहा है कोई माहताब कोउनकी निगाहे नाज़ ने मदहोश कर दियामैं ने छुआ नहीं है क़सम से शराब कोदिल चाहता है उनको दुआ से नावाज़ दूँजब देखता हूँ बाग़ में खिलते गुलाब कोये ज़िन्दगी तिलिस्म के जैसी है दोस्तोक्या देखते नहीं हो बिखरते हुबाब कोजुगनू कहीं न आए मुक़ाबिल में एक दिनये बात परेशां किए है आफ़ताब कोइन्सान बन गया है ‘रज़ा’आदमी से वोदिलसे पढ़ा है जिसने ख़ुदा की किताब को_________________________हक़ बातें तू हरगिज़ ना कह पाएगाअहसानों के तले अगर दब जाएगासारे ग़म उसके धूमिल पड़ जाएंगेजिसको मुश्किल में जीना आ जाएगामेरी दुनिया खुशीओं से भर जाएगीमुझको तेरा साथ अगर मिल जाएगाउस दिन मेरी तन्हाई मुस्काएगीजिस दिन मेरा साजन लौट के आएगाछत पे अगर वो बे पर्दा आ जाएँ तोचाँद भी उनको देख के जल भुन जाएगाक्यूँ दौलत पे लोग ‘रज़ा’ इतराते हैंजब की ये सब मिट्टी में मिल जाएगा__________________________मेरा हमदम है तो हर ग़म से बचाने आएमुश्किलों में भी मेरा साथ निभाने आएचाँद तारे भी यहाँ बन के दिवाने आएउनकी खुश्बू के समन्दर में नहाने आएरश्क करते हैं जिन्हे देखकर सितारे भीमस्त नज़रों से वही जाम पिलाने आएउनके दीदार से आंखों को सुकूं मिलता हैख़ुद से कर-कर के कई बार बहाने आएउनकी निसबत से ज़माने की ख़ुशी हासिल हैमेरे हाथों में तो अनमोल ख़ज़ाने आएFeb19_________________________पहले ग़लती तो बता दे मुझकोफिर जो चाहे वो सज़ा दे मुझकोसारी दुनिया से अलग हो जाऊँख़ाब इतने न दिखा दे मुझकोहो के मजबूर ग़म-ए-दौरां सेये भी मुमकिन है भुला दे मुझकोया खुदा वक़्त-ए-नज़ा से पहलेउसका दीदार करा दे मुझकोसाथ चलना हो ‘रज़ा’ नामुमकिनऐसी शर्तें न सुना दे मुझको__________________________कौन कहता है की नज़र तक हैवार उनका मेरे जिगर तक हैमस्त नज़रों का मय जिधर तक हैखूबसूरत फ़िज़ा उधर तक हैचाँद निकला है मेरे आँगन मेंरोशनी मेरे बामो दर तक हैचाँद सूरज चले इशारों सेउनके क़ब्ज़े में तो सजर तक हैग़म ख़ुशी ज़िंदगी में हैं शामिलअब निभाना तो उम्र भर तक है_________________________रात का जादू चल जाएगाजिस दम सूरज ढल जाएगासँभल के चलना सीख लें वर्नाकोई तुझको छल जाएगाबचपन के दिन याद आएँगेजिस्म जवां जब ढल जाएगाग़म से हमने यारी करलीवक़्त बुरा अब टल जाएगाअँगारे मत बोना घर मेंघर आँगन सब जल जाएगादुनिया का दस्तूर ‘रज़ा’हैआज जो है वो कल जाएगा__________________________शाम आना है सुब्ह जाना हैदिल सितारों से क्या लगाना हैप्यार उल्फत वफ़ा मुहब्बत सबये तो जीने का इक बहाना हैदिल ये कहता है तुम चले आओआज मौसम बड़ा सुहाना हैग़म फ़क़त है नहीं मेरे संग मेंचंद खुशिओं का भी खज़ाना हैसच नही होतीं ख़्वाब की बातेंख़्वाब होता मगर सुहाना हैऐ ‘रज़ा’ हौसला रहे कायमचोट खाकर भी मुस्कुराना है__________________________2उसे ख़्यालों में रखता हूँ शायरी की तरहमुझे वो जान से प्यारी है ज़िंदगी की तरहतमाम उम्र समझता रहा जिन्हे अपनागया जो वक़्त गए वो भी अज़नबी की तरहमहक रहा है ज़माने का हर चमन जिनसेवो बेटियां हैं इन्हे खिलने दो कली की तरहकी जिसके आने से महफ़िल में उजाला बरसेये कौन आया है महफ़िल में रोशनी की तरहवो मेरा चाँद अगर छत पे आ गया तो ‘रज़ा’अंधेरी रात भी चमकेगी चांदनी की तरहNov18_________________________ग़मों की लज़्ज़त चुराके लेजा मेरी मसर्रत चुराके लेजाया ज़ौक़-ए-उल्फ़त चुराके लेजा या दिल की हसरत चुराके लेजाक़दम क़दम पर उजाला बन कर ये साथ देंगी तेरा हमेशामेरी सख़ावत चुरा के लेजा मेरी शराफ़त चुराके लेजाबना सके तो बना ले कोई हमारे जैसा तू एक चेहराये मेरी सूरत चुराके लेजा ये मेरी रंगत चुराके लेजाकरम का गुलशन खिलेंगा इकदिन मुझे भरोसा है मेरे रब परभले ये हिम्मत चुराके लेजा भले ये ताक़त चुराके लेजाये मेरी धड़कन ये मेरी साँसें ये जिस्म मेरा है इक अमानततू मेरी दौलत चुराके लेजा तू मेरी शोहरत चुराके लेजामेरा हुनर तो अता-ए-रब है इसे चुराना बहोत है मुश्किल’रज़ा’ की आदत चुराके लेजा ‘रज़ा’ की फ़ितरत चुराके लेजाOct17__________________________वतन की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओअमन की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओबहारों से नज़ारों से सितारों से नहीं मतलबनयन की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओगुलो गुलशन कली औ फूल शबनम मन को भाते हैचमन की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओन तो शिकवा शिकायत रूठने की बात मत करनामिलन की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओबिना समझे न ढूंढो ऐब मेरी शायरी में तुमसुख़न की बात करनी हो तो मेरे पास आ जाओ(90) _________________________ Nov17जब, तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगीलब, तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगीतुम मेरे साथ हो, चांदनी रात हो, होंट की बात हो, ज़ुल्फ़ की बात होतब, तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगीहम नहीं चाँद तारे ये काली घटा गूंचा ओ गुल ये बुलबुल ये महकी फिज़ासब, तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगीहम गुनहगार है, हम सियह कार हैं, फिर भी रहमो करम पे यकी है हमेंजब, तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगीऐ ‘रज़ा’ दर – बदर हम भटकते रहे प्यार क्या, प्यार का इक निशाँ ना मिलाअब, तुम्हारी महब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगी_________________________________सलीम रज़ा रीवा

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 05/02/2019
    • SALIM RAZA REWA 10/02/2019
  2. Bindeshwar Prasad sharma 05/02/2019
  3. SALIM RAZA REWA 10/02/2019

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