निन्दक

निन्दक खोजन को चला मिला न हमकों एकनेक-नेक तुम नेक हो कहते मिले अनेककहते मिले अनेक नेक भी ग्लानि न छाईजैसे चलती जौंक चीरती जाती काईकहें सुकवि देवेश देशभर अपना वंदकशत्रुभाव रखने वाले भी नहीं हैं निन्दक

निन्दक जब कोई नहीं, नियरें रक्खें काहि?वन्दक शत्रु विशेष है, तजें जाहि अरु ताहितजें जाहि अरु ताहि आह जग को तज देबौएकहि हरि सरबस लगे ताकौ ही सेबौकहें सुकवि देवेश अहितकर होते वन्दकहृदय बसैबो कों न मिलो मोय एकहु निन्दक

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/02/2019
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/02/2019

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